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मेडिकल स्टोरों पर CCTV अनिवार्य करने पर भड़के केमिस्ट, बोले- छोटे दुकानदारों पर बढ़ेगा बोझ; डेटा लीक का खतरा

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:17 AM (IST)

दवा विक्रेताओं ने केंद्र सरकार के मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी अनिवार्य करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने ...और पढ़ें

दिल्ली के मेडिकल स्टोरी सें सीसीटीवी अनिवार्य करने का विरोध। फोटो: एआई जनरेटेड

दिल्ली के मेडिकल स्टोरी सें सीसीटीवी अनिवार्य करने का विरोध। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. मरीजों की निजता का हनन होने का खतरा

  2. सीसीटीवी डेटा सुरक्षा और जिम्मेदारी पर संशय

  3. छोटे दुकानदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता और नियम पालन के नाम पर सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के प्रस्तावित कदम पर दवा विक्रेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है।

रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस–वन दिल्ली (आरडीसीए वन दिल्ली) ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव को वापस लेने या इसमें व्यावहारिक संशोधन करने की मांग की है।

संगठन के अध्यक्ष संदीप नांगिया की ओर से भेजे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार का यह कदम मरीजों की निजता पर सीधा हमला है।

दवा दुकान केवल सामान बेचने का स्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र है जहां मरीज या उनके परिजन गंभीर, गुप्त और संवेदनशील बीमारियों के बारे में फार्मासिस्ट से खुलकर चर्चा करते हैं।

केमिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि सरकार ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत प्रस्तावित नियम 65(2ए) को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श करे।

संस्था का कहना है कि सीसीटीवी कागजी बिलों और डाॅक्टरों के पर्चों (प्रिस्क्रिप्शन) का विकल्प नहीं बन सकता, इसलिए इसे जबरन लागू करने के बजाय जोखिम-आधारित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

केमिस्ट संगठन ने उठाए ये सवाल

  • मरीजों की निजता का हनन: यौन स्वास्थ्य, मानसिक रोग, महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियों की दवाएं लेते समय संवाद की रिकार्डिंग होने से मरीज सहज नहीं रह पाएंगे। वे फार्मासिस्ट को अपनी स्थिति बताने में हिचकिचाएंगे।
  • डेटा सुरक्षा पर संशय: सीसीटीवी की तीन महीने की रिकार्डिंग को सुरक्षित रखने की व्यवस्था में इस बात का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि इस संवेदनशील डेटा को कौन देखेगा, कौन ट्रांसफर करेगा या इसके लीक होने पर कौन जिम्मेदार होगा।
  • छोटे दुकानदारों पर आर्थिक बोझ: यह नियम सभी दुकानों पर समान रूप से थोपना ठीक नहीं है। बड़े मेडिकल स्टोरों के लिए यह आसान हो सकता है, लेकिन गली-मोहल्लों के छोटे दुकानदारों के लिए उपकरण और रखरखाव का खर्च उठाना मुश्किल होगा।
  • तकनीकी खामियों का खतरा: बिजली कटने, इंटरनेट बंद होने, या डीवीआर खराब होने जैसी स्थिति में दुकानदारों को बिना वजह दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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