'दिल्ली में घरेलू बोरवेल को मिलेगी अनुमति, जल्द आएगी नई नीति', मंत्री प्रवेश वर्मा ने की घोषणा
दिल्ली सरकार जल्द ही बोरवेल नीति लाएगी, जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में घोषणा की। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं ...और पढ़ें
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दिल्ली सरकार जल्द ही बोरवेल नीति लाएगी, जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में घोषणा की। फाइल फोटो
HighLights
घरेलू बोरवेल के लिए शुल्क पर मिलेगी अनुमति।
अवैध बोरवेल पर होगी सख्त कार्रवाई, नीति शीघ्र।
यमुना सफाई, सीवर कनेक्शन पर सरकार का जोर।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। बोरवेल को लेकर दिल्ली सरकार नीति तैयार कर रही है। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में कहा कि बोरवेल नीति शीघ्र घोषित होगी। इसमें अवैध बोरवेल वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं आवेदन करने पर बोरवेल लगाने की अनुमति मिलेगी।
इसके लिए उपभोक्ताओं को कुछ शुल्क भी देना होगा क्योंकि इससे उत्पन्न होने वाले सीवेज के उपचार का दायित्व जल बोर्ड पर होगा। उन्होंने प्रत्येक दिल्लीवासियों से प्रति दिन एक लीटर पानी बचाने की अपील की।
विधानसभा में 23 मार्च को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की वर्ष 2017 से 2022 तक की कैग रिपोर्ट रखी रखी गई थी। उस पर शुक्रवार को चर्चा के समय वर्मा ने कहा कि पूर्व की सरकार जल प्रबंधन, सीवर से संबंधित आधारभूत ढांचा और यमुना सफाई में विफल रही। कैग रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है। इस पर जवाब देने का समय आया तो विपक्ष सदन से बाहर है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पूर्व सरकार के खराब प्रबंधन के कारण गैर राजस्व जल 53 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे 15 प्रतिशत करना है। दिल्ली में बिजली के कनेक्शन 60 लाख से अधिक और पानी का कनेक्शन 30 लाख है। यानी 30 लाख घरों में अवैध रूप से पानी का उपयोग हो रहा है। इससे जल बोर्ड को राजस्व हानि हो रही है।
उन्होंने कहा कि जल आपूर्ति में सुधार के लिए 36 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पानी की उपलब्धा बढाई जा रही है। चंद्रावल और वजीराबाद जैसे प्रमुख परियोजनाओं पर फिर से काम शुरू करने के साथ ही दूसरे राज्यों के सहयोग से पानी की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास हो रहा है।
केंद्र सरकार के सहयोग से हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में रेणुकाजी, लखवार व किशाऊ बांध परियोजनाओं के काम में तेजी आई है। एसटीपी को वैश्विक मानक के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसके उपचारित पानी का 75 पार्कों में उपयोग के लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। साथ ही निर्माण कार्य में इसके उपयोग के लिए नीति तैयार होगी। इससे पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी।
35 सीवेज नए उपचार संयंत्र होंगे स्थापित
उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई सरकार की प्राथमिकता है। यमुना में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बिना उपचारित सीवेज का उसमें गिरना है। इसके लिए 35 सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपीः का निर्माण और पुराने का वैश्विक मानक के अनुरूप उन्नयन किया जा रहा है। भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सीवेज उपचार क्षमता 1500 एमजीडी करने पर काम चल रहा है।
नजफगढ़ नाले सहित प्रमुख नालों का इन-सीटू उपचार किया जाएगा। लगभग 20 लाख घरों में सीवर कनेक्शन नहीं है। गंदगी नालों के माध्यम से सीधे यमुना में पहुंच रहा है। सभी 1799 अनधिकृत कालोनियों को सीवर लाइन से जोड़ने का लक्ष्य। चार सौ कालोनियों में काम चल रहा है। पिछले एक वर्ष में 180 किमी से अधिक नई सीवर लाइन बिछाई गई है।
