दिल्ली के बायोडायवर्सिटी पार्कों में मिले 'प्रकृति के प्रहरी', पहली बार दिखीं ड्रैगनफ्लाई की 2 नई प्रजातियां
दिल्ली के सात बायोडायवर्सिटी पार्कों में हुए सर्वे में ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई की दो नई प्रजातियां मिली हैं, जिससे ये ...और पढ़ें

पाइड पैडी स्कीमर। सौजन्य- यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क
HighLights
दिल्ली के बायोडायवर्सिटी पार्कों में ड्रैगनफ्लाई की दो नई प्रजातियां दर्ज हुईं।
ड्रैगनफ्लाई मच्छर नियंत्रण में महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रहरी की भूमिका निभाते हैं।
ये जलस्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। कंक्रीट के बढ़ते जंगल के बीच दिल्ली के बायोडायवर्सिटी पार्क प्राचीन उड़ने वाले जीवों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन रहे हैं। दिल्ली विकास प्रधिकरण (डीडीए) के सात बायोडायवर्सिटी पार्कों में हुए तीन दिवसीय ड्रैगनफ्लाई एवं डैम्सेलफ्लाई सर्वे में दो ऐसी प्रजातियां पहली बार दर्ज की गईं, जो पहले इन पार्कों के रिकार्ड में नहीं थीं।
अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में येलो-टेल्ड ऐशी स्किमर और यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में ब्लू ग्रास डार्ट देखी गई। 17 से 19 सितंबर तक हुए सर्वे में विज्ञानियों, शोधकर्ताओं और विभिन्न कालेजों के छात्रों ने सभी सात पार्कों में इन कीटों की मौजूदगी दर्ज की।

सर्वे के मुताबिक यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में इस साल 23 प्रजातियां दर्ज हुईं, जो 2025 की 21 प्रजातियों से अधिक हैं। अरावली में 16, कमला नेहरू रिज में 22, तुगलकाबाद में 12, नीला हौज में 13, तिलपथ वैली में चार और कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क में 15 प्रजातियां मिलीं।
सातों पार्कों में कुल 11,154 ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा 4234 कालिंदी पार्क में और 2520 कमला नेहरू रिज में मिलीं।
मच्छरों के खिलाफ प्राकृतिक प्रहरी
ड्रैगनफ्लाई केवल देखने में आकर्षक कीट नहीं हैं। इनके वयस्क और पानी में रहने वाले निम्फ दोनों शिकारी होते हैं। एक वयस्क ड्रैगनफ्लाई रोजाना 30 से 100 तक मच्छर खा सकती है, जबकि निम्फ अवस्था में भी ये बड़ी संख्या में मच्छरों के लार्वा खाती हैं। इस तरह ये मच्छरों की प्राकृतिक संख्या नियंत्रित करने में भूमिका निभाती हैं।
पानी की सेहत का भी संकेत
ड्रैगनफ्लाई का जीवन पानी वाले पारिस्थितिकी तंत्र से गहराई से जुड़ा है। इनका अधिकांश जीवन निम्फ अवस्था में पानी में बीतता है। इसलिए पानी के प्रदूषण और आवास में बदलाव का असर इन पर पड़ता है।

यही वजह है कि ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई को जलस्रोतों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
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भारत में ओडोनाटा वर्ग की करीब 600 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि दिल्ली में अब तक 51 प्रजातियों की जानकारी है। यमुना और अरावली के बाढ़ क्षेत्र, आर्द्रभूमि, मौसमी जलस्रोत, घास के मैदान और वन क्षेत्र इन जीवों के लिए प्रजनन और रहने का महत्वपूर्ण आवास बन रहे हैं।
बॉक्स-1 : वर्षवार स्थिति
| बायोडायवर्सिटी पार्क | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|
| यमुना | 21 | 21 | 21 | 23 |
| अरावली | 11 | 10 | 16 | 16 |
| कमला नेहरू रिज | 25 | 25 | 26 | 22 |
| तुगलकाबाद | 14 | 12 | 14 | 12 |
| नीला हौज | 13 | 5 | 15 | 13 |
| तिलपथ वैली | 5 | 7 | 6 | 4 |
| कालिंदी | 8 | 14 | 20 | 15 |
सर्वे में दर्ज ड्रैगनफ्लाई-डैम्सेलफ्लाई
- यमुना पार्क : 23 प्रजातियां | 1,156 जीव
- अरावली : 16 प्रजातियां | 2,249 जीव
- कमला नेहरू रिज : 22 प्रजातियां | 2,520 जीव
- तुगलकाबाद : 12 प्रजातियां | 396 जीव
- नीला हौज : 13 प्रजातियां | 523 जीव
- तिलपथ वैली : 4 प्रजातियां | 76 जीव
- कालिंदी : 15 प्रजातियां | 4,234 जीव
नई प्रजातियां
- अरावली : येलो-टेल्ड ऐशी स्किमर
- यमुना : ब्लू ग्रास डार्ट
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