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अमेरिका-मिडिल ईस्ट छोड़ पूर्व एशिया चले भारतीय! दिल्ली-मुंबई एयरपोर्ट्स पर बदला इंटरनेशनल ट्रैवल का ट्रेंड

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:27 AM (IST)

दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहां पश्चिम एशिया और ...और पढ़ें

दिल्ली एयरपोर्ट से एशिया-पैसिफिक के यात्रियों में 11.4 प्रतिशत का भारी उछाल। AI जनरेटेड

दिल्ली एयरपोर्ट से एशिया-पैसिफिक के यात्रियों में 11.4 प्रतिशत का भारी उछाल। AI जनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली एयरपोर्ट पर एशिया-पैसिफिक यात्रियों की संख्या में 11.4% वृद्धि।

  2. पश्चिम एशिया, अमेरिका से हटकर पूर्व-दक्षिण पूर्व एशिया पर ध्यान केंद्रित।

  3. भू-राजनीतिक तनाव, कड़ी वीजा नीतियों ने यातायात बदलाव को प्रेरित किया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता, एयरस्पेस बंद होने और अमेरिका की कड़ी वीजा नीतियों ने भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

अब तक खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप के भरोसे चलने वाले भारत के दो सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय गेटवे, दिल्ली और मुंबई , अब तेजी से पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों को अपना नया ग्रोथ इंजन बना रहे हैं।

यात्रियों में 11.4 प्रतिशत का उछाल

आईजीआई एयरपोर्ट की संचालन एजेंसी डायल के चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अगस्त के आधिकारिक आंकड़े इस बड़े बदलाव की पुष्टि करते हैं। जहां दिल्ली से कुल अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक 0.8 प्रतिशत बढ़कर 86.2 लाख (पिछले साल 85.5 लाख) रहा, वहीं एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के यात्रियों में 11.4 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जो 32.1 लाख से बढ़कर 35.7 लाख पहुंच गया।

इसके ठीक उलट, उत्तर अमेरिका का ट्रैफिक 26.2 प्रतिशत गिरकर 7.5 लाख से घटकर सीधे 5.5 लाख रह गया है। इसके अलावा, खाड़ी देशों के यात्रियों में 4.1 प्रतिशत की गिरावट आई (24.7 लाख से घटकर 23.7 लाख) और अफ्रीका के ट्रैफिक में 10.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई (1.7 लाख से घटकर 1.5 लाख), जबकि यूरोप का ट्रैफिक 19.6 लाख से मामूली बढ़कर 19.7 लाख (0.9 प्रतिशत बढ़त) के साथ लगभग स्थिर बना हुआ है।

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क्या है कारण

इस बदलाव के पीछे सटीक कारण और बदलते प्रोटोकॉल हैं। पहला, पाकिस्तानी एयरस्पेस की लगातार बंदी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एयरलाइंस को लंबे और वैकल्पिक रूट लेने पड़ रहे हैं, जिससे विमान ईंधन की खपत और आपरेटिंग कास्ट बढ़ी है, और अमेरिका व खाड़ी देशों का सफर बेहद महंगा हो गया है।

वहीं, दूसरा, अमेरिका और कनाडा में भारतीय छात्रों व विजिटर्स के लिए कड़े नियम, वीजा मिलने में देरी और एयर इंडिया द्वारा अहमदाबाद हादसे के बाद अपनी लांग-हाल (लंबी दूरी की) उड़ानों में कटौती करने से उत्तर अमेरिका का ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

नया प्रोटोकॉल भी लागू

तीसरा, लुफ्तहंसा , स्विस और ब्रिटिश एयरवेज जैसी प्रमुख यूरोपीय एयरलाइंस ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानें घटाकर भारत के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाई है, जिससे यूरोप रूट पर ट्रैफिक बना हुआ है। इसके साथ ही, सुरक्षा और इमिग्रेशन को लेकर एक बड़ा नया प्रोटोकॉल भी लागू हुआ है।

वहीं, हाल ही में अमृतसर से दिल्ली आए इटली के तीन नागरिकों के बिना इमिग्रेशन क्लियर कराए सीधे जर्मनी जाने वाली फ्लाइट में सवार होने की गंभीर चूक के बाद एयर इंडिया ने अपना 'हब-एंड-स्पोक' इमिग्रेशन सिस्टम बदल दिया है।

नए नियम के तहत, दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग कोडशेयर फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को उनका आगे का बोर्डिंग पास और इमिग्रेशन औपचारिकताएं अब केवल दिल्ली एयरपोर्ट पर ही पूरी करनी होंगी।

मुंबई एयरपोर्ट पर भी नजर आ रहा है असर

यह फेरबदल मुंबई एयरपोर्ट में भी साफ दिख रहा है। मुंबई एयरपोर्ट का 48.8 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक मिडिल ईस्ट पर निर्भर रहा है, लेकिन अब वहां से भी ईस्ट एशिया और साउथ-ईस्ट एशिया (जैसे वियतनाम, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया) की मांग में रिकार्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अनुमान है कि नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस बदलाव को और मजबूती देगा, जहां से एयरलाइंस सुदूर पूर्व और आस्ट्रेलिया के लिए रूट्स तैयार कर रही हैं।

उम्मीद कायम

चुनौतियों के बावजूद, डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पणिकर के मुताबिक इस वित्तिय वर्ष में दिल्ली एयरपोर्ट का कुल पैसेंजर फुटफाल (घरेलू + अंतरराष्ट्रीय) 8.2 करोड़ रहने की उम्मीद है, जो विगत वित्तिय वर्ष के 7.9 करोड़ से करीब 4 प्रतिशत अधिक है। आगामी विंटर शेड्यूल (25 अक्टूबर से मार्च अंत) में दिल्ली से फिलीपींस एयरलाइंस (मनीला), ईवीए एयर (ताइपे), हन्नी एयर (मंगोलिया) और उराल एयरलाइंस (रूस) की नई सेवाएं शुरू हो रही हैं।

इसके अलावा, एयरबस ए350, बोइंग 787 और ए321एक्सएलआर जैसे नए जमाने के विमानों के बेड़े में शामिल होने से एअर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस अगले 12 से 18 महीनों में जापान, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए सीधी उड़ानों का विस्तार करने जा रही हैं।

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