10 साल में कितनी जहरीली हुई दिल्ली की हवा? प्रदूषण पर सबसे बड़ी स्टडी शुरू, AI और सैटेलाइट से होगी मैपिंग
दिल्ली में 10 साल बाद प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने के लिए एक नई हाई-टेक स्टडी शुरू हुई है। ...और पढ़ें

AI और सैटेलाइट से प्रदूषण स्रोतों की पहचान (एआई इमेज)
HighLights
दिल्ली में 10 साल बाद नई प्रदूषण स्टडी शुरू।
AI और सैटेलाइट से प्रदूषण स्रोतों की पहचान होगी।
2027 तक विश्लेषण, भविष्य के अनुमान भी मिलेंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आप जो धुआं पी रहे हैं, वह 10 साल पहले से कितना अलग है? क्या गाड़ियों की नई टेक्नोलॉजी और सख्त नियमों से प्रदूषण के स्रोत बदल गए हैं? इन सवालों का जवाब देने के लिए 10 साल बाद एक बार फिर दिल्ली की हवा का पूरा हिसाब-किताब लगाया जा रहा है।
साल 2016 में IIT-कानपुर ने दिल्ली के प्रदूषण स्रोतों पर पहली बड़ी स्टडी की थी। अब उसके लगभग 10 साल बाद एक नई और हाई-टेक स्टडी शुरू हुई है। यह स्टडी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) पुणे के नेतृत्व में IIT-दिल्ली, TERI और IITM पुणे मिलकर कर रहे हैं।
इस बार स्टडी पूरे दिल्ली और NCR के 27 जिलों को 500 मीटर x 500 मीटर के छोटे-छोटे बॉक्स में बांटा जाएगा। हर बॉक्स सिर्फ 0.25 वर्ग किलोमीटर का होगा। साल 2026 को बेस ईयर मानकर गाड़ियों, फैक्ट्रियों, सड़क की धूल और कचरा जलाने जैसे सभी स्रोतों से निकलने वाले PM2.5, PM10, NOx और CO जैसे प्रदूषकों को मापा जाएगा।
2025 का फ्रेमवर्क, CPCB कर रहा था फंड
CAQM के टेक्निकल मेंबर एसडी अत्री ने बताया कि पिछले 10 साल में बहुत कुछ बदला है। NCR में कोयला बैन हो चुका है, फैक्ट्रियां क्लीन फ्यूल पर शिफ्ट हुई हैं और गाड़ियां भी बदली हैं, इसलिए नया आकलन जरूरी था। इस स्टडी के लिए CAQM ने अप्रैल 2025 में एक फ्रेमवर्क बनाया था और CPCB इसे फंड कर रहा है।
2027 में आएगा विश्लेषण
इस स्टडी की सबसे बड़ी खासियत AI और सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल है। सैटेलाइट फोटोज से हॉटस्पॉट की पहचान होगी और जमीन पर टीम जाकर उसे वेरिफाई करेगी। यह स्टडी 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक चलेगी और इसका विश्लेषण 2027 के मिड तक आएगा।
सिर्फ मौजूदा हाल नहीं, बल्कि 2030, 2035 और 2040 तक हवा कैसी होगी, इसके अलग-अलग अनुमान भी बताए जाएंगे। इसके लिए NCR में 6 सुपर-साइट्स भी बनाई जा रही हैं, जिनमें से एक नई राजेंद्र नगर में शुरू हो चुकी है।
