500 पेट्रोल पंपों पर ‘PUCC नहीं तो ईंधन नहीं’, 62 हॉटस्पॉट गोद लेंगे नेता; दिल्ली में प्रदूषण को लेकर सख्ती
दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार ने समयबद्ध कार्रवाई और हॉटस्पॉट की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों को सौंपने का फैसला किया है।

दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
15 नवंबर तक 3065 किमी सड़कों का पुनर्विकास, 334 दल निगरानी करेंगे।
'पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं' अभियान 500 पेट्रोल पंपों पर चलेगा।
सार्वजनिक परिवहन हेतु 'दिल्ली मेट्रो सारथी' ऐप का शहरव्यापी अभियान।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार ने अब कार्रवाई को समयबद्ध करने के साथ ही अलग-अलग प्रदूषण हॉटस्पॉट की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों को सौंपने का फैसला किया है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में वाहन, सड़क की धूल, निर्माण कार्य, कचरा, उद्योग और हरित क्षेत्र समेत प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों पर अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर हॉटस्पॉट के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर उसकी लगातार समीक्षा की जाए। दिल्ली और एनसीआर के लिए कार्ययोजनाओं को 10 अक्टूबर तक अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कृषि और निर्माण गतिविधियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।
500 पेट्रोल पंपों पर पीयूसी की जांच
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम के लिए ‘पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं’ अभियान को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। दिल्ली के सभी 500 एएनपीआर कैमरा युक्त पेट्रोल पंपों पर जागरूकता और जांच अभियान चलाया जाएगा।
नियमों का पालन नहीं करने वाले पंपों पर कार्रवाई होगी। पिछले एक वर्ष में एएनपीआर कैमरों के जरिए बीएस-3 और उससे पुराने करीब 7055 जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहन चिह्नित किए गए हैं। नवंबर में प्रदूषण जांच केंद्रों को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा।
62 प्रदूषण-यातायात स्थलों की निगरानी
प्रदूषण और यातायात की समस्या वाले 62 स्थानों को सांसद, विधायक और पार्षद गोद लेकर अधिकारियों, आरडब्ल्यूए, व्यापारियों और यातायात पुलिस के साथ हर सप्ताह मौके का निरीक्षण करेंगे। इनमें से 42 स्थानों की समस्याएं दूर की जा चुकी हैं और आठ अन्य को अक्टूबर तक ठीक करने का लक्ष्य है।
सड़क पुनर्विकास में भी तेजी लाई जाएगी। वर्ष 2026 के लिए तय 3065 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1193 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हुआ है। शेष काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कचरा जलाने पर निगरानी, 98 कचरा केंद्र
कचरा प्रबंधन और सड़क की सफाई के लिए वार्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। बाजारों से कचरा उठाने की व्यवस्था मजबूत करने के साथ ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के पालन पर सख्ती होगी।
दिल्ली में कचरा प्रबंधन से जुड़े एमआरएसएम केंद्रों की संख्या पिछले साल के 76 से बढ़कर 98 हो गई है। पूरे शहर में ‘शून्य कचरा जलाने’ का अभियान चलाया जाएगा।
हरित क्षेत्र के मामले में अब केवल पौधे लगाने के बजाय उनके जीवित रहने और उजड़े क्षेत्रों को हरा-भरा करने पर जोर रहेगा। दिल्ली में 71 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं और चिन्हित 434 एकड़ में से 433 एकड़ क्षेत्र को हरा किया जा चुका है।
निर्माण स्थलों पर कैमरों से निगरानी
निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पंजीकृत निर्माण स्थलों पर कैमरों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। ‘मलबा’ एप को भवन योजना प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क दोगुना करने, कार्यालयों के समय में अंतर और 50 प्रतिशत घर से काम जैसे उपायों को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
मेट्रो-बस को बढ़ावा, 5088 इलेक्ट्रिक बसें
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 1 से 10 अक्टूबर तक ‘दिल्ली मेट्रो सारथी’ एप के इस्तेमाल का शहरव्यापी अभियान चलाया जाएगा। आरडब्ल्यूए और जनप्रतिनिधियों के साथ डाउनलोड शिविर लगाए जाएंगे।
दिल्ली के सभी 228 मेट्रो स्टेशनों पर अंतिम छोर तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया गया है। बस बेड़े की संख्या बढ़कर 6840 हो गई है, जिसमें 5088 इलेक्ट्रिक बसें हैं।
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों और परिवर्तन योजना को बढ़ावा देने, औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी मजबूत करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शुरू करने और वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने का फैसला भी हुआ।
प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई के तहत दिसंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच 11,271 इकाइयों का सर्वेक्षण किया गया और 2283 इकाइयों को बंद या सील किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने एफएम रेडियो समेत दूसरे माध्यमों से लोगों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जानकारी देने और उन्हें अभियान का सक्रिय भागीदार बनाने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और निर्माण स्थलों पर कैमरों समेत तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई।
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