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दिल्ली की हवा सुधारने के लिए 22 नई तकनीकें तैयार, प्रदूषण हॉटस्पॉट पर जल्द शुरू होगा ट्रायल

Published: Tue, 10 Mar 2026 09:57 PM (IST)Updated: Tue, 10 Mar 2026 10:00 PM (IST)

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू हुए 'इनोवेशन चैलेंज' से 22 ...और पढ़ें

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू हुए 'इनोवेशन चैलेंज' से 22 अत्याधुनिक तकनीकें चुनी गई हैं। इमेज एआई

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू हुए 'इनोवेशन चैलेंज' से 22 अत्याधुनिक तकनीकें चुनी गई हैं। इमेज एआई

HighLights

  1. 22 नई तकनीकें दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट पर होंगी तैनात।

  2. वाहन उत्सर्जन और एम्बिएंट एयर प्यूरीफिकेशन पर केंद्रित समाधान।

  3. ट्रायल के बाद डेटा आधारित स्वच्छ वायु रणनीति बनेगी।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग अब एक नए और आधुनिक चरण में प्रवेश कर गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू किए गए ''इनोवेशन चैलेंज'' के तहत चुनी गई 22 अत्याधुनिक तकनीकें अब जमीनी ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले कुछ हफ्तों में इनको दिल्ली के प्रमुख प्रदूषण हाटस्पाट पर तैनात किया जाएगा।

वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और चयन प्रक्रिया

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इन तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इस चैलेंज के लिए देश भर से कुल 284 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। गहन तकनीकी जांच और ''इंटरनल टेक्निकल इवैल्यूएशन कमेटी'' की समीक्षा के बाद केवल 22 इनोवेटिव समाधानों को ही ट्रायल के लिए शार्टलिस्ट किया गया है।

दो श्रेणियों में बंटे हैं समाधान

इन 22 तकनीकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:-

  • वाहन उत्सर्जन नियंत्रण (13 डिवाइस) : इसमें बसों और ट्रकों के लिए व्हीकल-माउंटेड एयर प्यूरीफायर, रेट्रोफिट एमिशन-कंट्रोल सिस्टम और बायो-अल्कलाइन एग्जॉस्ट स्क्रबर शामिल हैं।
  • एम्बिएंट एयर प्यूरीफिकेशन (9 डिवाइस) : ये खुले इलाकों, निर्माण स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें डस्ट सप्रेशन यूनिट और स्माग-कंट्रोल जैसी तकनीकें शामिल हैं।

प्रमाण के आधार पर होगा चयन

पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य मानक ''प्रमाण और डेटा'' होगा। उन्होंने कहा, 'हम उन तकनीकों की पहचान करना चाहते हैं जो न केवल प्रभावी हों, बल्कि जिन्हें बड़े पैमाने पर दिल्ली में लागू करना व्यावहारिक हो। यह ट्रायल हमें सबसे हाई-इम्पैक्ट समाधान चुनने में मदद करेगा।'

ट्रायल के दौरान दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) डेटा कलेक्शन और परफार्मेंस रिव्यू पर करीबी नजर रखेगी। इन परीक्षणों के परिणामों के आधार पर ही भविष्य की क्लीन-एयर रणनीति का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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