प्रदूषण से जंग में 12 हजार करोड़ से भी ज्यादा खर्च, फिर भी जहरीली हवा में सांस ले रहे लोग
देश में स्वच्छ हवा के लिए 12 हजार करोड़ से अधिक खर्च होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ ...और पढ़ें

जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर लोग ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
स्वच्छ हवा पर 12 हजार करोड़ खर्च, स्थिति जस की तस।
दिल्ली में पीएम10 स्तर राष्ट्रीय मानक से 3.3 गुना अधिक।
117 शहरों में पीएम10 का वार्षिक औसत स्तर मानक से ऊपर।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के विभिन्न शहरों को स्वच्छ हवा देने के लिए सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ से भी ज्यादा रूपये खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन, अफसोस की बात है कि अब तक धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इतना भारी भरकम पैसा खर्च किए जाने के बावजूद भी लोग दमघोंटू हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
कैसा है दिल्ली का सूरतेहाल?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-2026 में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शामिल 130 शहरों में से 117 शहरों में पीएम 10 का वार्षिक औसत स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक रहा। सिर्फ 13 शहर ही इसकी सीमा तक पहुंच पाए थे।
वहीं, अगर देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें, तो यहां भी हालात जस के तस बने हुए हैं। यहां भी स्थिति सुधरने का नाम हीं ले रही है। लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं।
2016 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पीएम 10 और पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर किसी भी साल राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं रहा। 2025 में पीएम 10 का स्तर 197.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक 60 से 3.3 गुना अधिक है। कुल मिलाकर, ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि दिल्ली में स्थिति किसी भी सूरत में सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
नहीं सुधर रही स्थिति
दुर्भाग्य की बात यह है कि दिल्ली को प्रदूषण रहित बनाने की दिशा में अनेक तरह के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। लेकिन, उस लक्ष्य को प्राप्त करने में हम बहुत दूर हैं।
सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली में तमाम प्रयासों के बावजूद भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।
हालांकि, दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में शुरुआत में पीएम 10 में 20 से 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया था, बाद में इसे 2025-26 तक 40 प्रतिशत कमी लाने या वार्षिक औसत स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचाने के लक्ष्य में बदल दिया गया।
आंकड़े भी चिंताजनक
आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 की तुलना में 2025-26 में 43 शहरों में पीएम 10 का स्तर बढ़ा। इन शहरों ने एनसीएपी के तहत कुल 2,857 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, 23 शहरों में प्रदूषण का स्तर 2017-18 के मुकाबले बढ़ा था।
