24 घंटे बाद भी नहीं खुली डीडीए की नींद, नरेला में दो बच्चों की गड्ढे में गिरकर हुई ती मौत
नरेला में वर्षा के पानी से बने गड्ढे में दो बच्चों की मौत के 24 घंटे बाद भी डीडीए ने ...और पढ़ें
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दो बच्चों की मौत के 24 घंटे बाद भी नहीं चेता डीडीए। जागरण
HighLights
नरेला में गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत।
24 घंटे बाद भी डीडीए ने नहीं की कोई कार्रवाई।
स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर सुरक्षा अलर्ट कर रहे।
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। बाहरी दिल्ली में नरेला सेक्टर जी-7, जी-8 स्थित हाउसिंग पॉकेट-4 के सामने वर्षा के पानी से बने गड्ढे में नहाने उतरे दो बच्चों की मौत के 24 घंटे बाद भी डीडीए की नींद नहीं खुली है।
शुक्रवार को दोपहर तक यहां न तो कोई संकेतक लगाए गए थे और न ही गड्ढा भ्रवाया गया है। यहां सामान्य दिनों की तरह कुछ बच्चे खेलने आए थे।
किसी को अंदेशा तक नहीं था
घटनास्थल के साथ ही युवा-बच्चे खेलने आते हैं। यहां किसी को अंदेशा तक नहीं था कि पानी के नीचे इतना बड़ा गड्ढा होगा। नितीन ने बताया कि यह गड्ढे घुटने या कमर तक ही होता था। यहां इतना गहरा गड्ढा कब खोद दिया गया पता ही नहीं चला।
डीडीए को गड्ढा खुदवाने के बाद ध्यान देना चाहिए था कि वर्षा का पानी भरने के बाद इसकी गहराई का अंदाजा लगाना असंभव हो जाएगा। ऐसा हादसा बच्चों के साथ होना ही था, क्योंकि उनको गहराई का अंदाजा ही नहीं था।
सामान्य दिनों की तुलना में कम पहुंचे बच्चे
शुक्रवार को सामान्य दिनों की तुलना में कम बच्चे पहुंचे। घटनास्थल के समीप दुकान चला रहे सुलेमान ने बताया कि वह दोपहर को मौके पर गए थे। कुछ बच्चे यहां साथ वाली जगह पर खेलते दिखाई दिए तो उनको भगा दिया। डीडीए को कम से कम अब गार्ड बैठा देना चाहिए था। यह भी नहीं कर पाते तो गड्ढे के चारों ओर टेप लगा देते या संकेतक ही लगा देते।
दो बच्चों की मौत भी भूल गए
दुकानदार शोएब ने बताया कि दो बच्चों की मौत को डीडीए भूल गया है। चार-पांच दिन बाद यहां के लोग भी भूल जाएंगे। कुछ बदलने वाला नहीं है। ऐसा नहीं होता तो अब तक यहां सुरक्षा का इंतजाम हो गया होता। हम तो यही कर रहे हैं जो यहां आता है उसे बता देते हैं अब वह माने या न माने, यह उस पर निर्भर है।
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सोशल मीडिया से कर रहे अलर्ट
स्थानीय युवा जब डीडीए प्रशासन नहीं जागा तो सोशल मीडिया पर वीडियो बना कर स्वयं लोगों केा अलर्ट कर रहे हैं। इनका कहना है कि वीडियो देखकर शायद बच्चे यहां आने से पीछे हट जाएं और स्वजन अपने बच्चों को यहां खेलने के लिए न आने दें। लेकिन पांच-दस लोग यहां जैसे-तैसे आ ही रहें हैं।
