आग, धुआं और चार धमाके... दल्लूपुरा में भीषण आगजनी से दहशत में लोग, बच्चों को लेकर भागे परिवार
पूर्वी दिल्ली के दल्लूपुरा गांव में एक लकड़ी के गोदाम में भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में धुआं ...और पढ़ें
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दल्लूपुरा में लकड़ी गोदाम में भीषण आग, धमाकों से दहशत, परिवार बच्चों संग भागे।
HighLights
दल्लूपुरा गांव के लकड़ी गोदाम में लगी भीषण आग।
आग के दौरान चार धमाके हुए, फैली दहशत।
लोग बच्चों और सामान लेकर घरों से बाहर भागे।
नितीश कुमार, पूर्वी दिल्ली। दल्लूपुरा गांव में लकड़ी के गोदाम में रविवार को लगी भीषण आग से त्राहिमाम रहा है। आग इतनी भीषण थी गांव में धुंआ भर गया। लोगों का खांसते-खांसते बुरा हाल हो गया। आंखों में इतनी जलन की पानी रूकने का नाम नहीं ले रहा था। आग की वजह से बिजली काट दी।
लोग अपनी जान बचाने के बच्चों को लेकर लिए इधर उधर भागते रहे। करीब पांच फायर स्टेशन से आग बुझाने वाले वाहनों को बुलाया गया। आंखों में ज्यादा जलन होने की वजह से लोग बार-बार अपना मुंह धो रहे थे।

घरों में धुआं भरने और लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने से लोगों में दहशत
गोदाम से सटे एक मकान के पांच कमरे आग में जल गए। घरों में धुआं भरने और लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने से लोगों में ऐसी दहशत फैली कि वे बच्चों, गैस सिलिंडर और जरूरी सामान को लेकर घरों से बाहर सड़कों पर भागने लगे। कई परिवारों को करीब पांच घंटे तक सड़क पर ही रहना पड़ा।
दोपहर करीब 3:30 बजे गोदाम से अचानक आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। आसपास के मकानों में रहने वाले लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही धुएं का गुबार पूरे इलाके में फैल गया। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि आसपास के मकानों की ऊपरी मंजिलों तक पहुंचती दिखाई दे रही थीं।
आग के दौरान एक के बाद एक करीब चार धमाकों की आवाज आई
गोदाम से सटे चमन के मकान में अपने परिवार के साथ किराये पर रह रहे शुभम ने आंखों देखी घटना बताते हुए कहा कि आग के दौरान एक के बाद एक करीब चार धमाकों की आवाज आई। धमाकों की गूंज सुनकर लोग सहम गए और कमरों से बाहर भागने लगे। तब तक पूरे मकान में धुआं भर चुका था।

बाहर निकलने का रास्ता तक दिखाई नहीं दे रहा था। धुएं और घुटन के कारण लोग बेहोश होने लगे। शुभम के मुताबिक, गोदाम में रखे ज्वलनशील सामान के कारण करीब तीन घंटे तक आग धधकती रही। इस दौरान मकान के पांच कमरे आग की चपेट में आकर जल गए। वहीं, सगुन देवी ने बताया कि वह खाना खाने के बाद सो रही थीं।
अचानक लोगों की चीख-पुकार सुनकर उनकी नींद खुली
अचानक लोगों की चीख-पुकार सुनकर उनकी नींद खुली। आंख खुलते ही पूरा कमरा धुएं से भरा हुआ था और आग की लपटें कमरे के दरवाजे तक पहुंच रही थीं। उन्होंने बताया, ऐसा लगा मानो जिंदगी के अंतिम दृश्य देख रही हूं। घबराहट में वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। आसपास मौजूद कई बच्चे भी धुएं और डर के कारण बेहोश होने लगे।
गोदाम से सटे रामवीर के मकान में करीब 500 किरायेदार रहते हैं। आग की भयावहता देखकर लोगों ने अपने गैस सिलेंडर और जरूरी सामान घरों से निकालकर सड़क पर रख दिए। कई परिवार बच्चों के साथ रात नौ बजे तक सड़क पर खड़े रहे। घर को छू रहे लपटों को खड़े होकर देख रहे संदीप ने कहाना था कि रिहायशी इलाके में व्यवसायिक गतिविधियों के कारण आज कई परिवार उजड़ जाते।

अचानक धमाकों के कुछ ही मिनटों में चौथी मंजिल तक पहुंच गई
रविवार होने के कारण बच्चे घर के छत पर खेल रहे थे। अचानक हुए धमाकों और कुछ ही मिनटों में चौथी मंजिल तक पहुंच गई जहां बच्चे थे।आग की लपटों को देखकर परिवारों के हाथ-पांव फूल गए।किसी तरह हिम्मत जुटाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद पूरे गांव में देर शाम तक अफरातफरी का माहौल बना रहा।
लोग फोन पर एक-दूसरे का हालचाल लेते रहे। आग और धुएं के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे। आसमान में छाया धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। रविवार की घटना ने इस खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया।
