Exclusive: अब दिल्ली-NCR में शोर पर लगेगी लगाम, तय सीमा पार करते ही मिलेगा अलर्ट; CPCB ला रहा नया सिस्टम
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ध्वनि प्रदूषण की रियल टाइम निगरानी के लिए संशोधित तकनीकी मानक जारी किए हैं। ...और पढ़ें

दिल्ली में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए सीपीसीबी लाने जा रहा है नया सिस्टम। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
सीपीसीबी ने ध्वनि प्रदूषण निगरानी के नए मानक जारी किए
रियल टाइम केंद्र 24 घंटे शोर का स्तर मापेंगे, अलर्ट देंगे
आंकड़े 10 साल तक सुरक्षित रहेंगे, डिजिटल नक्शे पर दिखेंगे
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। सड़कों पर वाहनों का शोर हो या रिहायशी इलाकों में तेज आवाज से लोगों की परेशानी, अब इनकी निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने रियल टाइम ध्वनि प्रदूषण केंद्रों के लिए संशोधित तकनीकी मानक जारी किए हैं। सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों को इन मानकों के अनुसार निगरानी केंद्रों की खरीद और स्थापना करने के निर्देश दिए गए हैं।
योजना के तहत पहले चरण में चार निगरानी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये केंद्र 4जी/5जी नेटवर्क के जरिये केंद्रीय सर्वर और नियंत्रण कक्ष से जुड़े रहेंगे।
यहां दर्ज आंकड़ों से पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में, किस समय और कितनी देर तक शोर निर्धारित सीमा से अधिक रहा। सीमा पार होते ही संबंधित अधिकारियों को एसएमएस के जरिये अलर्ट देने की व्यवस्था होगी।
CPCB के पत्र के अनुसार, निगरानी केंद्रों के तकनीकी मानकों की समीक्षा राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, दिल्ली के विशेषज्ञों वाली समिति ने की है। इसके बाद संशोधित मानक जारी किए गए हैं।
हर सेकंड दर्ज होगा शोर का स्तर
प्रस्तावित व्यवस्था में हर एक सेकंड पर शोर का स्तर दर्ज किया जाएगा। केंद्र 30 से 140 डेसीबल तक के शोर को माप सकेंगे। आंकड़ों का स्थानीय बैकअप रखने के साथ केंद्रीय सर्वर पर कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी।
इससे अलग-अलग दिनों, महीनों और वर्षों के शोर की तुलना की जा सकेगी। दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, तिमाही और वार्षिक रिपोर्ट भी अपने आप तैयार हो सकेंगी।
नक्शे पर दिखेगी शोर की स्थिति
डिजिटल नक्शे पर निगरानी केंद्रों की लोकेशन और उनकी कार्यशील स्थिति देखी जा सकेगी। शोर निर्धारित सीमा पार करने पर संबंधित केंद्र का संकेतक रंग बदल देगा।
नियमों के अनुसार, आंकड़ों का एक हिस्सा आम लोगों के लिए भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे लोगों को अपने आसपास के शोर की स्थिति जानने में मदद मिल सकती है।
मौसम और यातायात के आंकड़ों से भी मिलान
निगरानी केंद्रों के साथ जरूरत के अनुसार मौसम संबंधी उपकरण, हवा की गति मापने वाले सेंसर और वाहनों की आवाजाही गिनने वाले उपकरण भी जोड़े जा सकेंगे।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र में शोर बढ़ने के पीछे यातायात और मौसम की कितनी भूमिका है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी निगरानी जारी रखने के लिए सौर ऊर्जा और बैटरी बैकअप का प्रविधान है।
हर छह महीने में जांच, छेड़छाड़ पर भी अलर्ट
आंकड़ों की सटीकता बनाए रखने के लिए उपकरणों का हर छह महीने में कैलिब्रेशन किया जाएगा। तकनीकी खराबी का पता लगाने के लिए स्वचालित जांच की व्यवस्था होगी। निगरानी केंद्र के केबिन को अनधिकृत तरीके से खोलने या उससे छेड़छाड़ होने पर भी अलर्ट जारी किया जा सकेगा।
