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'CJP संगठन वही है, लेकिन मकसद बदल गया है', सौरव-आशुतोष की जमानत याचिका पर दिल्ली HC की सख्त टिप्पणी

Published: Wed, 21 Oct 2026 12:24 PM (IST)Updated: Wed, 21 Oct 2026 01:17 PM (IST)

सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

सौरव और आशुतोष हिरासत के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट। फाइल फोटो

सौरव और आशुतोष हिरासत के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट। फाइल फोटो

HighLights

  1. सौरव दास, आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत को चुनौती दी।

  2. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई पर सहमति जताई।

  3. याचिका में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। न्यायिक हिरासत बढ़ाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) के निर्णय के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास व आशुतोष रांका ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को मामले पर सुनवाई पर सहमति जताई और याचिका पर न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ सुनवाई शुरू कर चुकी है।

मामले की सुनवाई शुरू

  • सौरव दास व आशुतोष रांका की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता अभिक चिमिनी ने कहा कि 14 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा, लेकिन हिरासत किस तरह और किस तरीके से ली जानी चाहिए, यह एक अलग विषय है।
  • मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि यह सौरव व आशुतोष द्वारा की गई दूसरी घटना है। आप ऐसे व्यक्ति हैं जिसने वास्तव में एक बॉन्ड तोड़ा है। 
  • अदालत ने कहा कि जब यह मामला आज ही आ रहा है, तो यहां भागकर आने की क्या जरूरत है? साथ ही, अगर यह एक ऐसा आदेश है जिस पर पुनर्विचार किया जा सकता है, तो क्या आपके लिए बेहतर नहीं होगा कि आप इसे वापस ले लें और देखें कि दोपहर दो बजे एसईएम के समक्ष क्या होता है, और फिर कानून के तहत आपके पास क्या विकल्प मौजूद हैं, इस पर विचार करें?
  • अदालत ने कहा कि जब आप दूसरी बार शांति भंग कर चुके हैं, तो क्या अधिकारियों को पूरी सख्ती बरतने का अधिकार नहीं है? धारा 226 के तहत, क्या मुझे अभी इन सब बातों में पड़ना चाहिए, या फिर घटनाओं को अपने क्रम से चलने देना चाहिए? क्या आपके लिए बेहतर यही नहीं होगा कि आप थोड़ा पीछे हट जाएं?
  • अभिक चिमिनी ने कहा कि इसका वह जवाब देंगें।
  • अदालत ने कहा, कृपया मेरी बात समझें। अभी बहस करने के बजाय, क्यों न आप अपनी दलीलें रिवीजन कोर्ट और फिर इस कोर्ट के लिए बचाकर रखें? मान लीजिए कि चार बजे चीजें आपके पक्ष में हो जाती हैं, तो फिर बात ही खत्म हो जाएगी। और अगर चीजें आपके पक्ष में नहीं होती हैं, तो आप रिवीजन कोर्ट और फिर इस कोर्ट में आ सकते हैं। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि थोड़ा पीछे हट जाएं और दो बजे के बाद वापस आएं।
  • चिमिनी ने कहा कि मेरा तर्क यह है कि यह बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है।
  • अदालत ने कहा कि बात यह है कि हमें तभी बहस करनी चाहिए जब जरूरी हो। लोगों को सुनाने के लिए बहस करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आप बहस करते हैं, तो इसके ऐसे नतीजे भुगतने होंगे, जिन्हें आप कभी बदल नहीं पाएंगे।
  • चिमिनी ने कहा कि इसके तहत जमानत से जुड़े निष्कर्षों को देखिए।
  • अदालत ने कहा कि अगर आप जिद कर रहे हैं, तो कृपया बहस के लिए आगे आएं। वैसे, आपकी उम्र क्या है?
  • आप जेन-जी नहीं है... कोर्ट ने पूछा
  • अभिक चिमिनी ने कहा कि सौरव 27 साल का है और आशुतोष 32 साल का है।
  • कोर्ट: तो फिर आप जेनजी नहीं हैं। जेन-जी क्या होता है?
  • कोर्ट को बताया गया कि 1997 के बाद पैदा हुए लोग जेनजी होते हैं।
  • अदालत ने कहा कि तो फिर आप जेन-जी नहीं हैं।
  • अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, 'सीजेपी... संगठन तो वही है मकसद बदल गया है' अदालत ने कहा कि यह छात्रों का विरोध था, इसमें बच्चे भी शामिल थे, लेकिन अब इसका मकसद कुछ और है। लोग वही हैं, पर मकसद बदल रहा है। है ना? पीठ ने कहा कि अगला सवाल यह होगा कि आप कौन हैं? आप क्या हैं? आपका संगठन क्या है और आपके संगठन का उद्देश्य क्या है? कृपया समझें कि जब शांति और व्यवस्था के बिगड़ने का अंदेशा हो, तो ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं। पीठ ने कहा कि जुलाई में जब आप पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान आए थे, तब संगठन तो वही रहा, लेकिन मकसद बदल गया। तो सवाल यह है कि जब ऐसे लोग हों जिनका मकसद लगातार बदलता रहता है।
  • कोर्ट: जब मामला शांति भंग करने का हो, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि आप कौन हैं और क्या करते हैं?
  • अभिक चिमिनी: मेरी दो मांगें हैं; पहली यह कि जमानत (श्योरिटी) को खारिज करना कानूनन गलत है और मुझे निजी मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए।
  • कोर्ट: आज की सुनवाई का मकसद क्या है? आप कोर्ट को ऐसी बहस में उलझा रहे हैं, जो शायद अंत में आपके पक्ष में न जाए। बस मुझे एक बात बताइए, ट्रायल कोर्ट में आज की सुनवाई का मकसद क्या है?
  • चिमिनी: आज न्यायिक हिरासत खत्म हो रही है, इसलिए वे मुझे पेश करेंगे।
  • दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि आज सौरव व आशुतोष को पेश किया जाना है। उन्हें आज नई जमानत देने का निर्देश दिया गया है।
  • अदालत ने चिमिनी से पूछा क्या आप आज नई जमानत दे रहे हैं?
  • चिमिनी ने जवाब में कहा कि कई बार जमानत दी है। 
  • कोर्ट: क्या जमानत खारिज होने के आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है?
  • चिमिनी ने जवाब दिया कि मेरी नजर में, हां। 
  • कोर्ट: क्या आप कोई सही जमानत नहीं दे सकते?
  • चिमिनी: कानून की नजर में मेरी जमानत सही है।
  • चिमिनी: 19 अक्टूबर का आदेश मूल रूप से गलत है, क्योंकि उन्हें सौरव व आशुतोष की हिरासत बढ़ाने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं था। एहतियाती हिरासत को मनमाने ढंग से लागू किया जा रहा है। 
  • कोर्ट: व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन अगर कानून में कोई उपाय मौजूद है।
  • अभिक चिमिनी ने कहा कि मेरा निवेदन है कि मेरे मुवक्किल की रक्षा करें।
  • कोर्ट: आपने अभी तक यह नहीं बताया कि आप धारा 226 के तहत क्यों आए हैं?
  • चिमिनी: मान लीजिए कि मैं इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करता हूं। एसईएम के सामने दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी। मेरी जमानत को किसी नए आधार पर खारिज कर दिया जाएगा।
  • कोर्ट: अगर यह प्रिवेंटिव कस्टडी है, तो आपके पास बंदी प्रत्यक्षीकरण का विकल्प है।
  • कोर्ट: प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती निरोध) के मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट दायर की जा सकती है। प्रिवेंटिव कस्टडी और प्रिवेंटिव डिटेंशन के बीच अंतर होता है।
  • चिमिनी: 19 अक्टूबर के आदेश में, उन्होंने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि उन्हें ऐसी कौन सी सामग्री मिली, जिसके आधार पर भविष्य में किसी आसन्न खतरे का अंदेशा जताया गया है।
  • कोर्ट: सवाल मजिस्ट्रेट की अपनी संतुष्टि का है। यह अदालत मजिस्ट्रेट की जगह खुद को रखकर किसी अलग नतीजे पर कैसे पहुंच सकती है?
  • अदालत: अपील में, अपीलीय अदालत तथ्यों और उनके मूल्यांकन पर गौर करके किसी नतीजे पर पहुंचती है, जबकि रिट में, अदालत केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया को देखती है, न कि खुद उस निर्णय को।

वकीलों ने की थी तत्काल सुनवाई की मांग

सौरव और आशुतोष के वकीलों ने मंगलवार को मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी, क्योंकि दशहरा के कारण इस पूरे सप्ताह हाई कोर्ट में अवकाश है।

गौरतलब है कि सोमवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोश रांका की हिरासत को 21 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

याचिका में आशुतोष और सौरव ने लगाए ये आरोप

याचिका में सौरव दास व आशुतोष रांका का आरोप है कि उन्हें लगातार हिरासत में रखना उनके स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि एसईएम ने गलत तरीके से उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। उन्होंने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने कहा कि उन्होंने जरूरी बॉन्ड नहीं भरा, जबकि कानून के मुताबिक उनके लिए जमानतदार पेश किए जा चुके थे।

सौरव दाव व आशुतोष रांका ने कहा कि एसईएम का आदेश बिना किसी स्वतंत्र जांच के, केवल पुलिस की अर्जी के आधार पर दे दिया गया है। इसमें यह नहीं देखा गया कि क्या वाकई उन्हें हिरासत में रखने जैसी कोई स्थिति है या नहीं।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी प्रतिबंधित जगह पर विरोध प्रदर्शन करना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कोई खतरा हाेने के बजाय ज्यादा से ज्यादा नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद हुए थे गिरफ्तार

13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था और एसईएम काेर्ट ने उन्हें 15 अक्टूबर को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था और फिर सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी।

अदालत ने कहा था कि सौरव दास और आशुतोष रांका का बर्ताव दिखाता है कि उन्हें कानून का कोई सम्मान नहीं है अौर वे शांति और व्यवस्था भंग कर सकते हैं।