CJP के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से पहले चीफ इमाम उमेर अहमद का बड़ा बयान, बहकावे में न आएं मुस्लिम समुदाय
CJP के जंतर-मंतर मार्च से पहले चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी ने मुस्लिमों से बहकावे में न आने की ...और पढ़ें
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डॉ. उमेर अहमद इलियासी। जागरण
HighLights
चीफ इमाम ने मुस्लिमों से जंतर-मंतर मार्च में शामिल न होने की अपील।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश का अमन-चैन बिगाड़ने की साजिश रच रही हैं।
दिल्ली में धारा 163 लागू, प्रदर्शनों से दूर रहने की सख्त सलाह।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर मार्च की घोषणा से ठीक पहले ऑल इंडिया इमाम संगठन के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी का बड़ा बयान आया है। उन्होंने देशभर के मुस्लिमों से बहकावे में न आने को कहा है।
शनिवार को सीजेपी ने जंतर-मंतर 2.0 की घोषणा की है, जिसमें बड़ी संख्या में जेन–जी के पहुंचने का आह्वान किया है। जिससे दिल्ली का माहौल खराब होने का अंदेशा है।
आरोप है कि बहकावे में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय भी विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होता है। ऐसे में 10 अक्टूबर को आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शन को लेकर ऑल इंडिया इमाम संगठन के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी का संदेश अहम है।
माहौल बिगाड़ने की साजिश
उन्होंने अपने बयान में मुस्लिम समुदाय और मस्जिदों के इमामों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन में शामिल न होने की अपील की है। डॉ. इलियासी ने एक विशेष संदेश जारी कर कहा कि देश में कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें अमन-चैन का माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रही हैं।
चीफ इमाम उमेर अहमद इलियासी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों और युवाओं को बरगलाकर उनका इस्तेमाल करते हैं। इतिहास गवाह है कि भावनाओं में बहकर लिए गए फैसलों के कारण कई निर्दोष लोग जेलों में बंद हैं और उनके परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
दिल्ली में धारा 163 लागू
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी दिल्ली में धारा 163 लागू है। ऐसे में किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होना कानूनी तौर पर नुकसानदेह साबित हो सकता है।
देशभर के मस्जिद करें एलान
इमामों से गुजारिश करते हुए उन्होंने कहा कि वे मस्जिदों से यह एलान करें कि कोई भी व्यक्ति या युवा बहकावे में आकर प्रदर्शन स्थल की ओर न रुख करे। इसके साथ ही, डॉ. उमेर अहमद इलियासी ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी भड़काऊ, आपत्तिजनक या अफवाह फैलाने वाले संदेशों को आगे न बढ़ाएं। मुस्लिम समुदाय शांति और सौहार्द का प्रतीक है, इसलिए भावनाओं के बजाय समझदारी और हिकमत से काम लेते हुए देश की शांति बनाए रखने में सहयोग करें।
