विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सीबीएसई ने निजी कंपनी के भरोसे दांव पर लगाया छात्रों का भविष्य! बिना प्रशिक्षण कॉपी जांचने का हुआ नुकसान?

Published: Thu, 28 May 2026 12:20 AM (IST)

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली विवादों में घिर गई है, जिसमें अपर्याप्त तैयारी, शिक्षकों के प्रशिक्षण की कमी और ...और पढ़ें

पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को कटघरे में ला दिया है। एआई इमेज

पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को कटघरे में ला दिया है। एआई इमेज

HighLights

  1. अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण ओएसएम प्रणाली में गड़बड़ी।

  2. धुंधली स्कैन कॉपियों से मूल्यांकन में गंभीर दिक्कतें।

  3. हजारों उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा स्कैनिंग/ऑफलाइन जांच।

रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश के लाखों छात्रों का भविष्य एक ऐसी डिजिटल जांच प्रणाली के भरोसे छोड़ दिया गया, जो पूरी तरह तैयार नहीं थी।

धुंधली स्कैन कापियां, गलत मूल्यांकन, दूसरी उत्तर पुस्तिका अपलोड होने, गायब पन्नों और अब ऑफलाइन जांच तक पहुंच चुके मामले में अब डिजिटल मार्किंग के लिए शिक्षकों को बिना व्यापक प्रशिक्षण दिए ही ओएसएम को लागू करने की बात सामने आ रही है। अब विवाद केवल मूल्यांकन गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लागू करने में जल्दबाजी और अधूरी तैयारी तक भी पहुंच रहा है।

पर्याप्त अभ्यास सत्र आयोजित नहीं किए

बीते वर्ष ओएसएम प्रणाली को लेकर सीबीएसई की संचालन समिति की बैठक में सुझाव दिया गया था कि ओएसएम प्रणाली को सभी विषयों में लागू करने से पहले विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट चलाए जाएं। देशभर में सीबीएसई के कुल 22 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर क्षेत्रीय परीक्षण नहीं किए गए। इसके बजाय गत जनवरी में दिल्ली के पांच स्कूलों में शिक्षकों के लिए सीमित अभ्यास सत्र आयोजित किए गए।

इस अभ्यास में शामिल कुछ शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने उसी समय बोर्ड अधिकारियों को कहा था कि प्रणाली को लागू करने से पहले ज्यादा प्रशिक्षण, बेहतर स्कैनिंग और तकनीकी सुधार जरूरी हैं। इसके बावजूद नौ फरवरी को ओएसएम लागू करने की घोषणा कर दी गई और 17 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गईं। मूल्यांकन कार्य सात मार्च से शुरू हुआ।

पूरे माॅडल को संकट में डाल दिया

उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने इस वर्ष पहली बार बड़े स्तर पर 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल जांच शुरू की थी। बोर्ड ने दावा किया था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मानवीय त्रुटियां कम होंगी, लेकिन परिणाम ऑन के बाद देशभर से जिस तरह की शिकायतें सामने आईं, उसने पूरे माॅडल को संकट में डाल दिया है।

सीबीएसई अधिकारी की संस्तुति लिख रहे

सीबीएसई ने स्वयं स्वीकार किया है कि 68,018 उत्तर पुस्तिकाओं को खराब स्कैन गुणवत्ता के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा। वहीं, 13,583 कापियों की ऑफलाइन जांच करानी पड़ी क्योंकि बार-बार स्कैन करने के बाद भी स्पष्ट प्रति तैयार नहीं हो पा रही थी। अब कुछ परीक्षकों का दावा है कि ऑफलाइन जांच के लिए कापियों पर सीबीएसई अधिकारी की संस्तुति लिखकर भेजा गया है।

स्टेप मार्किंग है महत्वपूर्ण 

डिजिटल मार्किंग से जुड़े कुछ शिक्षकों का दावा है कि प्रणाली पूरी तरह तैयार होने से पहले ही लागू कर दी गई। कुछ शिक्षकों ने तो यहां तक कहा कि वे वास्तविक मूल्यांकन के दौरान ही प्रणाली को समझते हुए कापियां जांच रहे थे। कई परीक्षकों का कहना है कि स्क्रीन आधारित जांच में उत्तरों के हिस्से छूटने की आशंका अधिक रहती है, खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में जहां स्टेप मार्किंग महत्वपूर्ण होती है।

उत्तर पुस्तिका पर सवाल उठाने की नौबत क्यों आई

बताते चलें कि कई विद्यार्थियों ने भी गणित और विज्ञान विषयों में स्टेप मार्किंग न हो पाने को लेकर रोष जताया है। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि परिणाम समय पर जारी करने के दबाव में मूल्यांकन की गति को प्राथमिकता दी जा रही थी।

इस मामले में शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि प्रणाली लागू करने की तैयारी, जवाबदेही और निगरानी का मामला है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और तैयार थी, तो फिर हजारों कापियों को दोबारा स्कैन करने, हजारों की ऑफलाइन जांच कराने और लाखों छात्रों को अपनी ही उत्तर पुस्तिका पर सवाल उठाने की नौबत क्यों आई।

विद्यार्थी बोले-हम परीक्षा दे रहे थे या प्रयोग झेल रहे थे

कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई गई, उसकी लिखावट तक उनकी नहीं थी। कुछ छात्रों ने कहा कि उनके साथ सीबीएसई को बिना तैयारी इस तरह का प्रयोग नहीं करना चाहिए था। पूरे लिखे हुए पन्नों को खाली मान लिया गया, जबकि कई मामलों में सही उत्तरों पर भी अंक नहीं दिए गए। धुंधली स्कैन कापियों और गायब पन्नों के स्क्रीनशाट लगातार सामने आ रहे हैं। एक काॅपी में तो एक अंक के बहुकिल्पीय प्रश्न में 0.5 अंक देने का मामला भी सामने आया है।

यह भी पढ़ें- शिक्षकों की लापरवाही...ब्लर कॉपियां या OSM साइट हो गई थी हैक; क्‍या छात्रों के इन 6 सवालों का जवाब देगा CBSE?

यह भी पढ़ें- CBSE OSM विवाद: राहुल गांधी ने मांगा न्यायिक जांच और SIT, पूछा- संदिग्ध कंपनी को कैसे दिया ठेका? बोर्ड ने नकारे आरोप