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CBSE का बड़ा फैसला: 10वीं के छात्रों को अब नहीं पढ़ना होगा पर्यावरण शिक्षा, बोर्ड ने बदला पूरा नियम

Published: Thu, 29 Oct 2026 05:15 PM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 05:19 PM (IST)

सीबीएसई ने नौवीं और दसवीं के विषय योजना में बदलाव किया है, जिसके तहत 2027-28 से दसवीं के छात्रों को पर्यावरण शिक्षा नहीं पढ़नी होगी।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. दसवीं से पर्यावरण शिक्षा विषय हटाया गया।

  2. व्यावसायिक शिक्षा अब अनिवार्य होगी छात्रों के लिए।

  3. विषय प्रतिस्थापन का नया प्रावधान लागू किया गया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और 10वीं के विद्यार्थियों की विषय योजना में बदलाव किया है। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2027-28 में 10वीं में पहुंचने वाले विद्यार्थियों को अब पर्यावरण शिक्षा नहीं पढ़नी होगी।

वहीं, वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नौवीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी विषय और माड्यूल आफ कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) भी हटा दिए गए हैं।

बोर्ड ने ये बदलाव अंतरविषयी क्षेत्र को लागू करने की निर्धारित समय-सारणी के अनुरूप किए गए हैं। वर्तमान में 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर ये बदलाव लागू नहीं होंगे। उनके लिए पुरानी विषय योजना ही जारी रहेगी।

10वीं में इन पांच विषयों की होगी बोर्ड परीक्षा

बोर्ड के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2027-28 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पांच विषय अनिवार्य होंगे। इनमें पहली भाषा (आर-1), दूसरी भाषा (आर-2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। इन पांच विषयों की बोर्ड परीक्षा सभी विद्यार्थियों को देनी होगी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी एक वैकल्पिक विषय भी चुन सकेंगे।

इसमें 57 विषयों की सूची में से किसी एक विषय का चयन किया जा सकता है। इसके अलावा, विद्यार्थी वैकल्पिक उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान या व्यावसायिक शिक्षा के तहत 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुन सकते हैं। इन वैकल्पिक विषयों में परीक्षा और मूल्यांकन की व्यवस्था विद्यार्थी के चुने गए विषय के अनुसार होगी।

कौशल शिक्षा अनिवार्य, 22 विषयों में से चुन सकेंगे विकल्प

सीबीएसई ने व्यावसायिक यानी कौशल शिक्षा को अनिवार्य रखा है। इसके लिए विद्यार्थी कौशल विकास विषय या बोर्ड की ओर से अधिसूचित 22 कौशल विषयों में से किसी एक का चयन कर सकेंगे। इन विषयों में सूचना प्रौद्योगिकी, एआइ, डाटा साइंस, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन, खुदरा कारोबार, सुरक्षा, इलेक्ट्रानिक्स एवं हार्डवेयर और डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार जैसे विकल्प शामिल हैं।

कौशल विकास विषय चुनने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। इसके लिए बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। हालांकि, 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुनने वाले विद्यार्थियों को 10वीं में संबंधित विषय की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। इसमें सफल होने पर अंक और ग्रेड बोर्ड की अंकतालिका में दर्ज होंगे। सफल विद्यार्थियों को संबंधित कौशल विषय का राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।

वैकल्पिक विषय से बदल सकता है अनुत्तीर्ण विषय

सीबीएसई ने 10वीं के परिणाम के लिए विषय प्रतिस्थापन का प्रविधान भी स्पष्ट किया है। यदि विद्यार्थी तीन विषयों गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में से किसी एक में 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, लेकिन चुने गए कौशल विषय में उत्तीर्ण हो जाता है, तो नियमानुसार कौशल विषय से उस विषय को बदला जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा कौशल विकास विषय चुनने वाले विद्यार्थियों को नहीं मिलेगी।

इसी तरह, यदि विद्यार्थी पहली या दूसरी भाषा में से किसी एक में 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, लेकिन वैकल्पिक भाषा में उत्तीर्ण हो जाता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत वैकल्पिक भाषा से उस विषय को बदलने का प्रविधान है।

विशेष जरूरत वाले बच्चों को विषय चुनने में मिलेगी छूट-

विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए बोर्ड ने अलग प्रविधान किए हैं। उन्हें एक अनिवार्य भाषा पढ़नी होगी, जिसकी बोर्ड परीक्षा होगी।

शेष चार बोर्ड परीक्षा वाले विषयों के लिए वे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अन्य भाषा, संगीत, चित्रकला, गृह विज्ञान, व्यवसाय के तत्व, बहीखाता एवं लेखांकन, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कौशल विषयों में से निर्धारित नियमों के अनुसार चयन कर सकेंगे।

वे अधिकतम दो कौशल विषय भी चुन सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ चुनने की अनुमति नहीं होगी।

कला और शारीरिक शिक्षा में मिलेंगे ग्रेड

10वीं में कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। इन विषयों में विद्यार्थियों को अंक के बजाय ग्रेड दिए जाएंगे। वहीं, भाषा-तीन और कौशल विकास.का भी स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन होगा। कौशल विकास में कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्कूल की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

10वीं में पांच अनिवार्य बोर्ड परीक्षा विषयों की व्यवस्था विद्यार्थियों पर परीक्षा का अनावश्यक दबाव कम करने में मदद करती है। इससे उन्हें केवल परीक्षा पर ध्यान देने के बजाय सीखने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा में लचीलापन और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए विषय चयन के विशिष्ट प्रविधान इस व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाते हैं।

- सुधा आचार्य, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस

 

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