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दिल्ली-NCR में CAQM ने खोली प्रदूषण नियंत्रण की पोल, हरियाणा में सबसे ज्यादा लापरवाही

Published: Sun, 19 Apr 2026 06:11 PM (IST)

सीएक्यूएम की रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण में गंभीर खामियां उजागर की हैं। हरियाणा में ग्रेप नियमों के ...और पढ़ें

सीएक्यूएम की रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण में गंभीर खामियां उजागर की हैं। इमेज एआई

सीएक्यूएम की रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण में गंभीर खामियां उजागर की हैं। इमेज एआई

HighLights

  1. हरियाणा में ग्रेप नियमों के पालन में सबसे अधिक कमी।

  2. दिल्ली-एनसीआर में निर्माण स्थलों के निरीक्षण में भारी गिरावट।

  3. सीएक्यूएम ने अधिकारियों पर कार्रवाई के दिए सख्त निर्देश।

संजीव गुप्ता, दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गहराते वायु प्रदूषण के संकट के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के कामकाज की एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट ने प्रदूषण रोकने के दावों की पोल खोल दी है, जिसमें जमीनी स्तर पर निगरानी और नियमों के कार्यान्वयन में भारी खामियां पाई गई हैं।

हरियाणा में नियमों की सबसे अधिक अनदेखी

सीएक्यूएम की इस समीक्षा रिपोर्ट में हरियाणा के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कामकाज में सबसे गंभीर कमियां उभरकर सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के सबसे सख्त चरणों (चरण तीन और चरण चार) के दौरान हरियाणा में निगरानी का स्तर बेहद निराशाजनक रहा।

निर्माण एवं विध्वंस (सीएनडी) साइट्स की जांच : ग्रेप के चरण चार के दौरान 500 वर्ग मीटर से अधिक की निर्माण साइटों के निरीक्षण में हरियाणा में 100 प्रतिशत की कमी पाई गई। यानी निर्धारित मानकों के अनुसार एक भी प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया। चरण तीन के दौरान भी यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर था।

मैकेनिकल रोड स्वीपिंग

सड़कों की धूल कम करने के लिए मशीनीकृत सफाई की व्यवस्था में भी हरियाणा (एनसीआर क्षेत्र) में 68 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई।

दिल्ली और उत्तर प्रदेश की स्थिति भी चिंताजनक

रिपोर्ट में केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली में सीएनडी साइटों के निरीक्षण में 87 प्रतिशत की कमी पाई गई, जबकि उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में यह आंकड़ा 97 प्रतिशत रहा। हालांकि, उत्तर प्रदेश ने मशीनीकृत रोड स्वीपिंग और मशीनों की तैनाती के मामले में निर्धारित लक्ष्यों को पार किया है, जो तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है।

राजस्थान का प्रदर्शन मिला-जुला

राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में निर्माण साइटों के निरीक्षण में 79 प्रतिशत की कमी मिली। वहीं, सड़कों की मशीनीकृत सफाई के मामले में यहां केवल 7 से 31 प्रतिशत तक का अंतर देखा गया, जो हरियाणा और दिल्ली की तुलना में काफी कम है।

आयोग की सख्त हिदायत और कार्रवाई के निर्देश

सीएक्यूएम ने इन 'गंभीर कमियों' को सामूहिक प्रयासों के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में हो, तब ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्ट में शिकायतों के निवारण की सुस्त रफ्तार पर भी चिंता जताई गई है। दिल्ली में प्राप्त 115 शिकायतों में से लगभग 47 प्रतिशत अनसुलझी रहीं।

आयोग ने अब सभी संबंधित राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया है कि वे उन अधिकारियों की पहचान करें जो ग्रेप के नियमों को लागू करने में विफल रहे हैं।

आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने और एक समयबद्ध कार्ययोजना के साथ जवाबदेही तय करने का आदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक एनसीआर में स्वच्छ हवा का सपना अधूरा ही रहेगा।

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