Explainer: सरकारी खामियों को हथियार बनाकर करते रहे ठगी, दूसरों के PAN पर अपनी फोटो चस्पाकर 50 करोड़ ठगे
सरकारी खामियों का फायदा उठाकर दो ठग भाइयों ने 200 से अधिक लोगों के पैन कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर करीब 50 करोड़ रुपये का लोन घोटाला किया।

दो ठग भाइयों ने एक ही नाम के 200 से अधिक लोगों का पैन डाउनलोड करके उनमें अपनी तस्वीर लगाकर करीब 50 करोड़ का लोन लेकर बड़ा गबन कर दिया है।
HighLights
दो ठग भाइयों ने 50 करोड़ का लोन घोटाला किया।
200 से अधिक लोगों के पैन कार्ड का दुरुपयोग हुआ।
ऑनलाइन कंपनियों की सत्यापन कमी से ठगी संभव हुई।
शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। सरकारी खामियां ठगों के लिए सुनहरा अवसर बन रही हैं। इन खामियों के बूते ठग बड़े ही शातिर तरीके से लोगों को कंगाल कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में दो ठग भाई पकड़े गए हैं, जिन्होंने एक ही नाम के 200 से अधिक लोगों का पैन डाउनलोड करके उनमें अपनी तस्वीर लगाकर करीब 50 करोड़ का लोन लेकर बड़ा गबन कर दिया है।
घर पर सत्यापन के लिए नहीं जाता कोई बैंक कर्मी
20 से अधिक कंपनियां हैं, जो एक रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का ऑनलाइन लोन देती हैं। लोन के लिए वे ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाती हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के पैन का गलत इस्तेमाल कर लोन तो नहीं ले रहा है। ये कंपनियां लोन लेने वाले व्यक्ति के घर पर सत्यापन के लिए कर्मचारी नहीं भेजती हैं। कंपनियों की इन खामियों को हथियार बनाकर ठग भोले-भाले लोगों को कंगाल बना रहे हैं।
आठवीं फेल शातिर ने की कारस्तानी
इन खामियों का फायदा उठाकर गुरुग्राम में रहने वाला आठवीं फेल व्यक्ति बड़े ही शातिर तरीके से पांच वर्षों से अपने भाई के साथ मिलकर ठगी कर रहा था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि 200 से अधिक लोगों के पैन कार्ड का इस्तेमाल करके उसने करीब 50 करोड़ रुपये का लोन अपने हमनाम लोगों के नाम पर लिया हुआ है। इन कंपनियों को लोन की वसूली उससे नहीं, बल्कि उन लोगों से करनी होगी, जिनके पैन पर लोन पास हुआ है। पहली बार पुलिस ने इस ठग को गिरफ्तार किया है।

एक माह में चार लाख की ठगी का था लक्ष्य
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अधिकतर कंपनियां वेबसाइट बनाती हैं। उन वेबसाइट पर आसानी से पैन नंबर भी मिल जाता है। गिरफ्तार गौरव छाबड़ा और शुभम छाबड़ा ने एक माह में करीब चार लाख रुपये की ठगी करने का लक्ष्य बनाया हुआ था।
दिनभर वे इंटरनेट मीडिया के जरिये अपने हमनाम लोगों की प्रोफाइल के साथ उनका पैन नंबर तलाशते थे।
प्रोफाइल पर उन्हें नाम व पिता का नाम मिल जाता था। पैन कार्ड में कोई बदलाव नहीं करते थे, सिर्फ फोटो की जगह अपना फोटो लगा देते थे। उसी पैन से वे जुगाड़ के जरिये पीड़ितों के नाम पर सिम कार्ड ले लेते थे।
बैंक उल्टा ही पीड़ितों को बना रही डिफाल्टर
लोन देने वाली कंपनियों से जब वे लोन लेते थे तो पैन कार्ड के साथ ही पीड़ितों की पहचान पर लिए गए मोबाइल सिम का नंबर देते थे। कंपनियों के प्रतिनिधि फोन करते थे और वे ही फोन उठाकर सत्यापन कर देते थे।
वे इस बात का फायदा उठाते थे कि ये कंपनियां किसी प्रतिनिधि को मौके पर भेजकर सत्यापन नहीं करवाती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन कंपनियों के चक्कर में लोगों का सिबिल स्कोर खराब हो रहा है। जरूरत पड़ने पर बैंक व अन्य कंपनियां उन्हें लोन नहीं दे रही हैं और उन्हें डिफाल्टर बना रही हैं।
कंपनियों के फर्जी हैं ठिकाने, पुलिस देगी नोटिस
पुलिस को जांच में पता चला कि ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनियों के ठिकाने अधिकतर फर्जी हैं। कुछ कंपनियों ने ऑनलाइन दावा किया हुआ है कि उनके कार्यालय नेहरू प्लेस में हैं। लेकिन पुलिस की टीम जांच करते हुए वहां पहुंची तो पता चला कि किसी कंपनी का कोई कार्यालय नहीं है। पुलिस ने जब उन कंपनियों के प्रतिनिधियों से ई-मेल के जरिये बात की तो कंपनियों ने जवाब दिया कि उनके कार्यालय नहीं हैं। वे ई-मेल के जरिये जवाब देती हैं।
कंपनियों को भेजा जाएगा नोटिस
अधिकारियों का कहना है कि ये कंपनियां लोन की वसूली थर्ड पार्टी से करवाती हैं। जब वसूली के लिए लोग पहुंचते हैं तो कई बार पीड़ितों को पता चलता है कि उनके पैन व अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर किसी ने लोन लिया हुआ है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में कंपनियों को नोटिस देकर जांच में शामिल होने के लिए कहा जाएगा।
कैसे पता करें कि पैन पर चल रहे कितने लोन?
पुलिस ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को पता करना है कि उसके पैन पर कितने लोन चल रहे हैं तो इसके लिए उसे अपनी बैंक शाखा में जाकर जानकारी लेनी चाहिए। गूगल पे और फोन पे के जरिये भी लोग अपना सिबिल स्कोर चेक कर सकते हैं।
