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फर्जी डिलीवरी से कागजों में बदल जाते थे मां-बाप, बच्चों की खरीद-फरोख्त के केस में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:15 AM (IST)

दिल्ली पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो तस्करी किए गए बच्चों ...और पढ़ें

बच्चों की तस्करी के केस में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट। फोटो: आर्काइव

बच्चों की तस्करी के केस में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. दिल्ली पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त गिरोह का पर्दाफाश किया

  2. फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड और प्रसव संबंधी कागजात बनाए जाते थे

  3. 24 आरोपितों के खिलाफ 600 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह ने तस्करी किए गए बच्चों को खरीदारों का अपना बच्चा साबित करने के लिए बाकायदा कागजी व्यवस्था तैयार कर रखी थी।

रोहिणी के बेगमपुर स्थित एक निजी अस्पताल का इस्तेमाल फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड , भर्ती से जुड़े दस्तावेज और प्रसव संबंधी कागजात तैयार करने में किया जाता था।

इसके बाद तस्करी कर लाए गए बच्चों को ऐसे दंपती को सौंप दिया जाता था, जिन्हें बच्चा चाहिए होता था। दिल्ली पुलिस की 600 से अधिक पन्नों की चार्जशीट में इस पूरे नेटवर्क के तौर-तरीकों का उल्लेख किया गया है।

24 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट

पुलिस ने मामले में 24 आरोपितों के खिलाफ तीस हजारी कोर्ट में तीन सितंबर को आरोप पत्र दाखिल किया है। इनमें 12 खरीदार और बेगमपुर स्थित निजी अस्पताल की संचालक डा. विवेकी भी शामिल हैं।

आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(4), 61(2), 3(5) समेत अन्य धाराओं और किशाेर न्याय एक्ट की धारा 81 के तहत कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से लाए गए नौ बच्चों को बरामद किया।

पांच लाख में नवजात का सौदा

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का पर्दाफाश एक मुखबिर की सूचना से हुआ। मुखबिर ने एक महिला को अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग बच्चों के साथ देखा था। जांच में महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई।

उसके बारे में जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने एक पुरुष और महिला अधिकारी को ग्राहक बनाकर उससे संपर्क कराया। ज्योति ने एक नवजात लड़के को पांच लाख रुपये में देने की बात कही और टोकन के तौर पर 20 हजार रुपये ले लिए।

बच्चे की डिलीवरी के लिए पांच जून को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास बुलाया गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर चार-पांच दिन के बच्चे को बरामद कर लिया और ज्योति को गिरफ्तार कर लिया। जांच आगे बढ़ी तो उसके गिरोह की अहम समन्वयक के तौर पर भूमिका सामने आई।

फर्जी दस्तावेजों से बनाते थे माता-पिता

चार्जशीट के मुताबिक, अस्पताल का इस्तेमाल ऐसे लोगों को भर्ती दिखाने, झूठी मेडिकल हिस्ट्री और उपचार संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने और प्रसव से जुड़े फर्जी दस्तावेज बनाने में किया जाता था।

इन दस्तावेजों के जरिए खरीदार दंपती बच्चे के जैविक माता-पिता होने का दावा कर सकें, इसके लिए कागजी रिकॉर्ड तैयार किए जाते थे। पुलिस का आरोप है कि डा. विवेकी तस्करी कर लाए गए बच्चों को अस्पताल में रखने के साथ ऐसे दंपती भी तलाशती थीं, जो बच्चे के लिए संपर्क करते थे।

डेढ़-दो लाख में खरीद, छह से आठ लाख में सौदा

जांच में पुलिस को ऐसे कई मामलों का पता चला, जिनमें बच्चों की खरीद-फरोख्त लाखों रुपये में हुई। पुलिस के अनुसार, बच्चों को डेढ़ से दो लाख रुपये में हासिल कर छह से आठ लाख रुपये तक में बेचा जाता था।

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