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उद्घाटन के बाद पहले ही दिन जाम में फंसा बारापुला फेज-3, सराय काले खां में राहत; सूर्यघड़ी-आश्रम पर बॉटलनेक

Published: Wed, 30 Sep 2026 02:17 PM (IST)

बारापुला फेज-3 कॉरिडोर खुलने से सराय काले खां पर दबाव घटा, लेकिन सूर्यघड़ी और आश्रम के पास वाहनों की संख्या ...और पढ़ें

HighLights

  1. बारापुला फेज-3 खुलने से सराय काले खां रिंग रोड पर राहत मिली

  2. सूर्यघड़ी के पास बारापुला फेज-1 पर नया बॉटलनेक बन गया

  3. आश्रम ज्वाइंट पर वाहनों का दबाव पहले से काफी बढ़ गया

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कारिडोर पर यातायात शुरू होने से सराय काले खां के सामने रिंग रोड पर वाहनों का दबाव कम हुआ है, लेकिन पहले ही दिन इसका असर दो दूसरे प्रमुख स्थानों पर दिखाई दिया।

बारापुला फेज-1 के ज्वाइंट प्वाइंट और आश्रम वाले ज्वाइंट पर वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति बन गई।

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बारापुला फेज-3 पर मयूर विहार से एम्स जाने वाले मार्ग पर सूर्यघड़ी के पास बॉटलनेक। फोटो: विपिन कुमार

सूर्यघड़ी के पास बना नया बॉटलनेक

बारापुला फेज-3 से मयूर विहार की ओर से आने वाले वाहन सूर्यघड़ी के पास बारापुला फेज-1 के ज्वाइंट से जुड़ रहे हैं। यहां से वाहन चालक बारापुला फेज-1 पर चढ़कर एम्स की ओर जा सकते हैं।

फेज-3 शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन इस संपर्क बिंदु पर पहुंचने लगे। इससे सूर्यघड़ी के पास वाहनों का दबाव बढ़ गया और यहां नया बॉटलनेक बन गया।

नतीजा यह रहा कि जिस परियोजना से तेज और सुगम सफर की उम्मीद है, उसके शुरू होते ही एक प्रमुख जोड़ पर यातायात की गति प्रभावित होती दिखी।

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दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे होते हुए जब एम्स की तरफ जाना होता है तो बन रहा बॉटलनेक। फोटो: विपिन शर्मा

आश्रम वाले ज्वाइंट पर भी बढ़ा दबाव

बारापुला फेज-3 से आश्रम की ओर जाने वाले ज्वाइंट पर भी पहले से अधिक वाहनों का दबाव दिखाई दिया। इस स्थान पर पहले ही यातायात अधिक रहता है।

डीएनडी, सराय काले खां और मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर से आने वाले वाहन इसी रास्ते से आश्रम की तरफ जाते हैं। अब बारापुला फेज-3 से आने वाली सड़क भी इसी स्थान के पास मिल रही है। इससे यहां वाहनों का दबाव और बढ़ गया है।

परियोजना से राहत की उम्मीद

बारापुला फेज-3 शुरू होने से सराय काले खां के सामने रिंग रोड पर राहत मिली है। हालांकि, नए मार्ग से एकाएक बढ़े यातायात के कारण दो ज्वाइंट प्वाइंट पर दबाव बढ़ना शुरुआती चुनौती के रूप में सामने आया है।

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