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दिल्ली में 'ओ' जोन विवाद: डर के साये में जी रही बदरपुर के 50 कॉलोनियों की तीन लाख आबादी

By Rais Rais Edited By: Sonu Suman
Published: Wed, 03 Jun 2026 06:07 AM (IST)

बदरपुर विधानसभा क्षेत्र की 50 कॉलोनियों के तीन लाख निवासी 'ओ' जोन में गलत वर्गीकरण के कारण भय में जी ...और पढ़ें

बदरपुर की लगभग तीन लाख की आबादी डर के साये में जी रही है।

बदरपुर की लगभग तीन लाख की आबादी डर के साये में जी रही है।

HighLights

  1. 50 कॉलोनियों के 3 लाख लोग 'ओ' जोन से प्रभावित।

  2. यमुना किनारे से 5.6 किमी दूर, फिर भी 'ओ' जोन में।

  3. डीडीए से 'ओ' जोन से बाहर करने की मांग, प्रदर्शन।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। बदरपुर विधानसभा क्षेत्र के नहरपार मीठापुर, सौरभ बिहार, हरिनगर, जैतपुर विस्तार, पार्ट-एक, पार्ट-दो की 50 कालोनियों को ''ओ'' जोन से बाहर न करने पर इनमें रहने वाली लगभग तीन लाख की आबादी डर के साये में जी रही है। रिकॉलगभग तीन लाख की आबादी डर के साये में जी रही है।र्ड में इन्हें यमुना किनारे दिखाया गया है, जबकि नदी किनारे से इनकी दूरी 5.6 किलोमीटर है। शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत डीडीए द्वारा जो कारण बताया गया है वह ओ-जोन का मामला है।

निवासियों का सवाल है कि जब यमुना किनारे से जो कॉलोनियां इतनी दूरी पर हैं, उसे कागजों में कैसे नदी की तलहटी में दिखाया गया। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे लेकर डीडीए के प्लानिंग कमिश्नर को पत्र लिखकर ''ओ'' जोन से बाहर निकाले जाने की मांग की है। विचार न किए जाने की स्थिति में इसे लेकर 15 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक पीएम उदय योजना के तहत केंद्र सरकार ने दिल्ली की 1731 कालोनियों को अधिकृत किया गया था, पर दिल्ली सरकार ने केवल 1511 कॉलोनियों को ही अधिकृत किया। इसमें मीठापुर, हरिनगर, जैतपुर गांव के साथ बसी कालोनियों को वंचित रखा गया।

इन कॉलोनियों को ''ओ'' जोन क्षेत्र घोषित कर दिया

मास्टर प्लान 2021 में दिल्ली विकास प्राधिकरण की गलती से गांव के साथ बसी इन कॉलोनियों को ''ओ'' जोन क्षेत्र घोषित कर दिया था, जबकि 28 सितंबर 2013 को इस क्षेत्र को ओ जोन से हटाकर एफ जोन में किया गया था। डीडीए की प्लानिंग विंग की ओर से 13 अगस्त 2014 को भारत सरकार को जो पत्र लिखा गया, उसमें तत्कालीन उपराज्यपाल ने स्वीकार किया कि जैतपुर, हरिनगर, मीठापुर व इनके पास बसी कॉलोनियां गलती से ओ जोन में शामिल की गई हैं।

एजेंसी ने शुल्क के रूप में भारी-भरकम राजस्व भी प्राप्त किया

यह भी लिखा था कि ओ जोन की सीमा दोबारा तय की जाए। पांच जुलाई 2019 को डीडीए ने एनजीटी को बताया था कि सीमांकन का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं 30 जनवरी को कमेटी को जवाब दिया कि जैतपुर, मीठापुर व हरिनगर ओ जोन सीमा से बहार हैं। इनकी अनधिकृत कॉलोनियों में डीडीए ने पीएम उदय योजना में रजिस्ट्रेशन व मकानों के सर्वे के लिए संबंधित एजेंसी ने शुल्क के रूप में भारी-भरकम राजस्व भी प्राप्त किया।

अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने के लिये सभी मकानों के दस्तावेज डीडीए सरिता विहार दिल्ली में जमा कराया गया। इन कालोनियों के बीच में ईको पार्क, 12वीं तक के सरकारी स्कूल, डीडीए फ्लैट्स आदि हैं। वहीं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सरजीत चौकन ने दक्षिणी दिल्ली सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी से गुहार लगाई है कि शेष बची 50 कालोनियों को भी अधिकृत की सूची में डाला जाए, ताकि यहां रहने वाला लगभग तीन लाख की आबादी को तनाव से मुक्ति मिल सके।

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