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'शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में पुलिस पर हमला चिंताजनक', जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:08 PM (IST)

जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 छात्रों और पत्रकारों को पटियाला ...और पढ़ें

पुलिसकर्मियों पर किए गए हमले पर कोर्ट ने जाहिर की चिंता। फोटो: आर्काइव

पुलिसकर्मियों पर किए गए हमले पर कोर्ट ने जाहिर की चिंता। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. जंतर मंतर पर गिरफ्तार 17 छात्रों, पत्रकारों को मिली जमानत

  2. कोर्ट ने कहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार, पुलिस पर हमला गंभीर

  3. आरोपित युवा, आदतन अपराधी नहीं, न्यायिक हिरासत ठुकराई गई

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर से गिरफ्तार किए गए 17 छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों को पटियाला हाउस की मजिस्ट्रेट ने सोमवार रात जमानत दे दी।

हालांकि, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिमेष कुमार ने कहा कि आरोपियों पर लगे आरोप गंभीर हैं और इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल भी हुआ है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार, हमला गंभीर

कोर्ट ने टिप्पणी की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि सभी आरोपित युवा हैं और आदतन अपराधी नहीं हैं।

पुलिस ने सभी आरोपियों को सोमवार देर रात अदालत के समक्ष पेश कर दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग को ठुकराते हुए चार अलग-अलग आदेश पारित करते हुए सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

पुलिस अधिकारी पर छेड़छाड़ का आरोप

प्रदर्शनकारियों को तब गिरफ्तार किया गया जब वे एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस अधिकारी पर SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है।

बस की खिड़की और शीशा तोड़ने का आरोप

सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि एक गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा होने और सार्वजनिक जगह पर बाधा डालने का आरोप है।

इसके अलावा हिरासत में लिए जाने के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ बदसलूकी की। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने बस की खिड़की और पीछे का शीशा भी तोड़ दिया।

वहीं, आरोपियों की तरफ से तर्क दिया गया कि लगभग 50 लोगों में से केवल 17 को गिरफ्तार किया गया और घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया।

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