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IIT दिल्ली को अनंत यार्दी देंगे 150 करोड़ का दान, एआई शोध और बुनियादी ढांचे को मिलेगी गति

Published: Thu, 19 Mar 2026 07:29 PM (IST)

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अनंत यार्दी ने संस्थान को 150 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह राशि ...और पढ़ें

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अनंत यार्दी ने संस्थान को 150 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फाइल फोटो

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अनंत यार्दी ने संस्थान को 150 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फाइल फोटो

HighLights

  1. अनंत यार्दी ने आईआईटी दिल्ली को 150 करोड़ रुपये दिए।

  2. एआई अनुसंधान और परिसर विकास में होगा उपयोग।

  3. यार्दी स्कूल ऑफ एआई को मिलेगा बड़ा हिस्सा।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली को पूर्व छात्र और यार्दी सिस्टम्स के संस्थापक एवं चेयरमैन अनंत यार्दी ने 150 करोड़ रुपये का बड़ा योगदान देने की घोषणा की है। यह सहयोग संस्थान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) अनुसंधान और परिसर के समग्र विकास को नई दिशा देगा।

इस राशि का एक बड़ा हिस्सा आइआइटी दिल्ली के यार्दी स्कूल आफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को दिया जाएगा। वर्ष 2020 में स्थापित यह स्कूल एआइ, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के क्षेत्र में शिक्षा और शोध को बढ़ावा देता है। यहां हेल्थकेयर, मटेरियल साइंस, रोबोटिक्स, इंडस्ट्री 4.0, मौसम पूर्वानुमान और परिवहन जैसे क्षेत्रों में अंतःविषयक शोध किया जा रहा है।

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आइआइटी दिल्ली के पूर्व छात्र और यार्दी सिस्टम्स के संस्थापक एवं चेयरमैन अनंत यार्दी। सौ. आइआइटी दिल्ली

40 से अधिक फैकल्टी सदस्य जुड़े

इस केंद्र से 40 से अधिक फैकल्टी सदस्य जुड़े हैं, जो मिलकर एक सशक्त और व्यावहारिक शोध पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं।

इसके अलावा, योगदान का एक हिस्सा आइआइटी दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर रिन्यूअल और एक्सपेंशन प्रोग्राम में लगाया जाएगा। इस पहल के तहत नए शैक्षणिक भवन और आवासीय सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा, जिससे संस्थान की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके।

अनंत यार्दी ने कहा कि आइआइटी दिल्ली ने उन्हें मजबूत शैक्षणिक आधार प्रदान किया, जिसने उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाया। वहीं, निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने इस योगदान को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे एआइ क्षेत्र में शोध क्षमताएं मजबूत होंगी और विश्वस्तरीय ढांचे के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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