Delhi Blast: पत्नी के स्टेज-4 कैंसर पर कोर्ट ने दी राहत, अल फलाह चांसलर जवाद सिद्दीकी को अंतरिम जमानत
साकेत कोर्ट ने लाल किला विस्फोट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी ...और पढ़ें

HighLights
जवाद सिद्दीकी को पत्नी के स्टेज-4 कैंसर पर अंतरिम जमानत मिली।
ईडी ने लाल किला विस्फोट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत का विरोध किया।
अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की संपत्ति ईडी ने अटैच की।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। लाल किला विस्फोट से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर व अल फलाह ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को साकेत की सत्र कोर्ट ने शनिवार को अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी को उनकी पत्नी की चिकित्सा स्थिति के आधार पर राहत दी। उनकी पत्नी स्टेज-चार मेटास्टैटिक ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और उनकी कीमोथेरेपी चल रही है।
देखभाल और सपोर्ट की जरूरत
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने कहा कि चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत एक कानूनी राहत है। कोर्ट ने कहा कि रिकाॅर्ड में रखे गए मेडिकल दस्तावेज से पता चलता है कि उनकी पत्नी की कीमोथेरेपी चल रही थी और उन्हें देखभाल और सपोर्ट की जरूरत है, क्योंकि वह अकेली रह रही हैं।
अदालत ने टिप्पणी की कि जवाद अहमद सिद्दीकी के बच्चे युएई में रह रहे हैं और उनमें से एक बोर्ड परीक्षा दे रहा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के युद्ध की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आरोपित के बच्चों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे 12 मार्च 26 को होने वाले कीमोथेरेपी के लिए भारत आएं।
इसके अलावा संबंधित अपराध के संबंध में ईडी की ओर से उठाई गई आपत्ति के संबंध में अभियोजन शिकायत (पीसी) पहले ही दायर की जा चुकी है और मामले को संज्ञान के बिंदु पर बहस के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
आरोपित की पत्नी को देखभाल और सपोर्ट की जरूरत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह भी सच है कि उसके अलावा उसका कोई परिवार या बच्चे नहीं हैं और सिर्फ आरोपित ही उसका पति है।
140 करोड़ रुपये की जमीन और भवन अटैच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जनवरी को हरियाणा में मौजूद अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की जमीन और भवन अटैच किए थे। पिछले साल नवंबर में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के बाद ये संपत्तियां केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आईं। ईडी ने सिद्दीकी और उसके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी फाइल की।
सिद्दीकी ने पीएमएलए के सेक्शन 45 के तहत अंतरिम जमानत मांगी थी, जिसमें कहा गया था कि उनकी पत्नी स्टेज-चार मेटास्टैटिक ओवरी कार्सिनोमा से पीड़ित हैं और राष्ट्रीय राजधानी के इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल में उनकी एग्रेसिव थर्ड-लाइन कीमोथेरेपी चल रही है।
यह भी बताया गया कि दंपती के तीन बच्चे यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में रहते हैं। एक बेटा बारहवीं की परीक्षा दे रहा है और बाकियों का भी भारत आना मुश्किल है। दूसरी ओर ईडी ने तर्क दिया कि सिद्दीकी की पत्नी का 2024 से इलाज चल रहा था और उनकी हालत स्थिर थी। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि परिवार के दूसरे सदस्य उनकी मदद कर सकते हैं और सिद्दीकी के बच्चे मदद के लिए विदेश से आ सकते हैं।
मेडिकल कंडीशन पर कोई सवाल नहीं उठाया
यह कहा गया कि सिद्दीकी के खिलाफ आरोपों में गंभीर आर्थिक अपराध और बड़ी रकम की मनी लांड्रिंग शामिल है। यदि उन्हें रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच में रुकावट डाल सकते हैं। ईडी के वकील ने आरोपित की पत्नी की बीमारी व मेडिकल कंडीशन पर कोई सवाल नहीं उठाया।
यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ जमीन व बिल्डिंग अटैच
फरीदाबाद के धौज इलाके में यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ ज़मीन और उसकी बिल्डिंग्स को पीएमएलए के तहत जारी एक प्रोविजनल आर्डर के मद्देनजर अटैच कर दिया गया है। ईडी ने पिछले साल नवंबर में सिद्दीकी को उसके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में एडमिशन लेने वाले छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े मनी लांड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था।
झूठे और भ्रामक दावे किए
अल फलाह ग्रुप में एजेंसी की जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दर्ज दो एफआईआर से शुरू हुई है। इन एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने गैर-कानूनी फायदे के लिए छात्र, अभिभावक और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को गुमराह करने के लिए नैक एक्रेडिटेशन और यूजीसी रिकग्निशन होने के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए।
यूनिवर्सिटी का रोल एक “व्हाइट-कॉलर टेरर” माड्यूल की जांच के दौरान जांच के दायरे में आया था। यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डाक्टर, मुज़म्मिल अहमद गनई और शाहीन सईद को एनआइए व जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यूनिवर्सिटी के हास्पिटल से जुड़े एक और डाॅ. उमर-उन-नबी की पहचान उस सुसाइड बाम्बर के तौर पर हुई, जिसने विस्फोटक से भरी कार चलाई थी और जिसकी वजह से लाल किले के बाहर धमाका हुआ था।
कोर्ट में ईडी की बातों पर गंभीरता से नहीं किया विचार
कोर्ट के आदेश को लेकर ईडी ने निराशा व्यक्त की है। ईडी के मुताबिक उनकी बातों पर कोर्ट में गंभीरता से विचार नहीं किया जबकि जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ कई और एफआईआर भी हैं। इसमें दिल्ली लाल किला ब्लास्ट से जुड़े यूएपीए केस में मुख्य आरोपित के तौर पर नामजद होने का गंभीर अपराध भी शामिल है, जहां अल फलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस में विस्फोटक सामग्री तैयार की गई थी।
यह भी पता चला है कि जवाद अहमद सिद्दीकी ने मौलवी और आतंकवादी डाक्टरों को भर्ती किया था जो धमाकों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे। ईडी के इन सभी गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपित को अंतरिम जमानत दे दी है।
जवाद की पत्नी उस्मा अख्तर 2022 से कैंसर का इलाज करा रही हैं और यह कंडीशन हाल ही में डायग्नोस नहीं हुई थी। जवाद की पत्नी बिना किसी केयर गिवर के समन पर ईडी के सामने पेश हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि हालत उतने गंभीर नहीं थे जितना जवाद अहमद सिद्दीकी ने कोर्ट के सामने दावा किया।
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