क्या हर फ्लाइट के कैप्टन का होता है डोप टेस्ट, पॉजिटिव आने पर क्या है सजा का प्रावधान?
दिल्ली-फुकेत फ्लाइट में टर्बुलेंस के बाद कैप्टन का डोप टेस्ट पॉजिटिव आया, जिससे विमान यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठे ...और पढ़ें
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फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट। AI जनरेटेड
HighLights
दिल्ली-फुकेत फ्लाइट में टर्बुलेंस, कैप्टन का डोप टेस्ट मारिजुआना पॉजिटिव।
पायलटों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य, पॉजिटिव पाए जाने पर सख्त कार्रवाई।
दूसरी बार पॉजिटिव पर लाइसेंस 3 साल निलंबित, तीसरी बार स्थायी रद।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हाल ही में सामने आई फ्लाइट से जुड़ी एक घटना ने विमान यात्रियों की चिंता बढ़ दी है। इस विमान घटना में 13 यात्री और चार क्रू मेंबर घायल हुए। लेकिन फ्लाइट कैप्टन की जिस बड़ी लापरवाही के कारण यह घटना हुई, उससे बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। क्या हर फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट होता है और अगर यह पॉजिटिव आ जाए तो क्या कार्रवाई होती है? अपने हर सवाल का जवाब जानिए-
दरअसल, बीते 4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट आसमान में भयानक टर्बुलेंस की चपेट में आई और इस दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया था। यह बड़ा हादसा भी हो सकता था लेकिन, गनीमत रही कि समय रहते स्थिति को संभाल लिया गया।
बता दें कि फ्लाइट के दिल्ली आते ही फ्लाइट के कैप्टन का साइकोएक्टिव सब्सटेंस के किए गए डोप टेस्ट किया गया। कैप्टन के डोप टेस्ट में ड्रग टेस्ट में मारिजुआना (भांग) की पुष्टि हुई है।
क्या है नियम?
भारत से बाहर जाने वाले पायलटों का प्रीफ्लाइट ब्रीथ एनालाइजर (बीए) टेस्ट भारत में हो जाता है, लेकिन विदेश से लौटते समय (जैसे फुकेट या अन्य अंतरराष्ट्रीय स्टेशन) स्थानीय स्तर पर भारतीय एयरलाइंस का डोप/ड्रग टेस्ट सेटअप नहीं होता। ऐसे में अगर कोई पायलट ओवरसीज ले-ओवर के दौरान किसी ड्रग्स या नशीले पदार्थ का सेवन करता है, तो विदेशी एयरपोर्ट पर टेक-ऑफ से पहले उसकी कोई रैंडम या रूटीन जांच नहीं होती। जब तक विमान भारत लैंड नहीं करता, तब तक उसके नशे में होने का पता लगाना लगभग नामुमकिन रहता है।
हर फ्लाइट के कैप्टन का होता है डोप टेस्ट?
इस घटना के बाद से विमान यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हर फ्लाइट से पहले कैप्टन का ड्रग टेस्ट होता है? इसका जवाब है नहीं। ड्रग टेस्ट और शराब के लिए ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट अलग-अलग होते हैं। नियमों के अनुसार, एयरलाइंस और एयर नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को हर साल अपने कम से कम 10% फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का रैंडम ड्रग टेस्ट कराना अनिवार्य है।
डोप टेस्ट में किन ड्रग की जाती है जांच?
इस जांच के दायरे में एम्फेटामाइन, मारिजुआना/कैनबिस, कोकीन, ओपिएट्स के साथ-साथ बार्बिट्यूरेट्स और बेंजोडायजेपीन जैसे साइकोएक्टिव ड्रग्स भी शामिल हैं।
ड्रग टेस्ट में 'नॉन-नेगेटिव' का मतलब पॉजिटिव नहीं!
प्रारंभिक जांच में अगर ड्रग की उपस्थिति का पता चलता है तो उसे 'नॉन-नेगेटिव' रिजल्ट कहा जाता है। फिर उसी नमूने की पुष्टि के लिए कन्फर्मेटरी टेस्ट होता है।
ड्रग जांच में पहली बार कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आया तो?
अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो पायलट को मेडिकल डॉक्टर, काउंसलिंग या डी-एडिक्शन-रिहैब प्रोग्राम से गुजरना होगा। इसके बाद दोबारा टेस्ट नेगेटिव आने और फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने पर ही उसे उड़ान की ड्यूटी पर वापस लिया जाएगा। ऐसे मामलों को 24 घंटे के भीतर DGCA को रिपोर्ट करना जरूरी है।
दूसरी या तीसरी बार आया टेस्ट पॉजिटिव तो होगी सजा?
रिहैबिलिटेशन के बाद ड्यूटी पर लौटे व्यक्ति का कन्फर्मेटरी टेस्ट अगर दूसरी बार भी पॉजिटिव आता है तो उसका लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। वहीं, तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस को स्थायी रूप से रद किया जा सकता है।
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पायलट ने ड्रग या अल्कोहल टेस्ट से किया इनकार, तो क्या?
कैप्टन अगर ड्रग या अल्कोहल टेस्ट कराने से इनकार कर देता है तो उसे तुरंत ड्यूटी से हटाया जाएगा। अगर 48 घंटे में टेस्ट क्लियर नहीं होता है तो लाइसेंस 1 साल के लिए सस्पेंड किया जा सकता है। दूसरी बार इनकार करने पर 3 साल का सस्पेंशन और बाद में नियम तोड़ने पर लाइसेंस हमेशा के लिए रद किया जाएगा।
