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एअर इंडिया की फ्लाइट में हुआ था भीषण टर्बुलेंस, 30 सेकेंड में 425 फीट नीचे आया विमान; जांच में बड़ा खुलासा

Published: Thu, 13 Aug 2026 07:11 PM (IST)Updated: Fri, 14 Aug 2026 12:21 PM (IST)

फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI-2379 गंभीर टर्बुलेंस की चपेट में आने से 30 सेकंड में ...और पढ़ें

एयर इंडिया का विमान 425 फीट नीचे आया था। (एआई जेनरेटेड इमेज)

एयर इंडिया का विमान 425 फीट नीचे आया था। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. एअर इंडिया विमान 30 सेकंड में 425 फीट नीचे आया।

  2. टर्बुलेंस के कारण 1600 फीट प्रति मिनट की रफ्तार से गिरा।

  3. सीट बेल्ट न लगाने वाले यात्री छत से टकराकर घायल हुए।

मुकेश ठाकुर, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रहा एअर इंडिया का विमान एआई-2379 टर्बुलेंस की चपेट में आने के दौरान इतनी तेजी से नीचे आया कि महज 30 सेकेंड में उसने 425 फीट की ऊंचाई गंवा दी।

प्राथमिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान विमान की नीचे आने की रफ्तार 1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंच गई थी। यानी विमान औसतन हर सेकेंड करीब आठ मीटर नीचे आ रहा था, जो लगभग ढाई मंजिल की इमारत जितनी ऊंचाई के बराबर है। अचानक ऊंचाई घटने से विमान में बैठे सीट बेल्ट नहीं लगाए कई यात्री उछलकर छत से टकरा गए, जबकि कुछ सीटों और गलियारे में गिर पड़े।

क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?

प्राथमिक जांच के अनुसार, घटना के समय विमान ओडिशा के रेंगाली जलाशय के ऊपर करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर लगभग 480 नाट की गति से उड़ रहा था। सुबह करीब 9:33:17 बजे विमान को अचानक तेज झटका लगा। इसके बाद विमान करीब 175 फीट नीचे आया। अगले 30 सेकेंड में इसकी ऊंचाई में करीब 425 फीट की कमी दर्ज की गई। इसी दौरान विमान की गति भी करीब 22 नाॅट कम हो गई।

कुछ क्षण के लिए भारहीनता जैसी स्थिति

विमान की वर्टिकल स्पीड (लंबवत गति) माइनस 1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंचने से उसके भीतर कुछ क्षण के लिए भारहीनता जैसी स्थिति बन गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज लंबवत गति से नीचे आने के दौरान विमान में बैठे ऐसे यात्री जो सीट बेल्ट नहीं लगाए थे, अपनी सीट से ऊपर उठ सकते हैं।

इसी वजह से कई यात्री छत से टकराए और कुछ सीटों तथा गलियारे में गिर गए। टर्बुलेंस के कारण केबिन में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। घटना में कई यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा।

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चार्ट में स्पष्ट दिख रहा है कि 9:33:17 बजे फ्लाइट ऊपर है और 9:33:48 पर तेजी से नीचे आ गई है।

हर सेकेंड तेजी से घटती रही ऊंचाई

एविएशन की ओर से जारी किए गए चार्ट में स्पष्ट दिख रहा है कि हादसे वाले दिन सुबह 9:32:46 बजे यह फ्लाइट 889 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से 36,000 फीट की ऊंचाई पर सीधे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही थी। इसके बाद 9:33:17 बजे यह 859.3 किमी प्रति घंटा की रफ्तार भरते हुए 36,175 फीट की ऊंचाई पर पहुंचती है।

यह वही समय था जब हादसा शुरू हो गया था। इसके बाद कुछ ही सेकेंड में यह फ्लाइट 9:33:48 बजे 848.2 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के साथ 35,750 फीट की ऊंचाई पर आ गई। यानी आधे मिनट के अंतराल में एयर इंडिया की यह फ्लाइट 425 फीट नीचे ऊतर गई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस हादसे के समय यात्रा कर रहे लोगों की जान को कितना बड़ा खतरा बस छूकर निकल गया।

मानसून के दौरान हल्का या मध्यम टर्बुलेंस सामान्य स्थिति

एविएशन विशेषज्ञ के अनुसार, मानसून के दौरान हल्का या मध्यम टर्बुलेंस सामान्य स्थिति है, लेकिन क्यूम्यलोनिंबस (सीबी) बादलों के भीतर या आसपास बनने वाले शक्तिशाली ऊपर-नीचे जाने वाले वायु प्रवाह से गंभीर टर्बुलेंस पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में विमान की ऊंचाई और गति दोनों अचानक प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों ने गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति की तुलना तेज रफ्तार कार के अचानक गहरे गड्ढे में उतरने से की। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों के लिए सीट बेल्ट बांधे रखना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। प्राथमिक जांच में सामने आए आंकड़े इस घटना के दौरान टर्बुलेंस की तीव्रता और उसके कारण विमान की ऊंचाई में हुई अचानक कमी को दर्शाते हैं।

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