फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट की अनियंत्रित उड़ान पर उठे गंभीर सवाल, क्यों नहीं कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग?
फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI-2379 के हवा में चार सेकंड तक अनियंत्रित होने के बाद ...और पढ़ें
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एअर इंडिया फ्लाइट के अनियंत्रित उड़ान पर उठे सवाल।
HighLights
एअर इंडिया की उड़ान चार सेकंड अनियंत्रित, इमरजेंसी लैंडिंग नहीं कराई।
पायलट के नशे में होने की शुरुआती जांच में पुष्टि।
डीजीसीए नियमों का उल्लंघन, यात्रियों की जान जोखिम में डाली।
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। फुकेट से नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान एआई-2379 में हवा में चार सेकंड तक विमान के 'अनियंत्रित' होने के मामले में अब एयरलाइन प्रशासन और सुरक्षा प्रोटोकाल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जहां एक ओर शुरुआती जांच में पायलट के नशे में होने की पुष्टि के बाद कुछ लोग एयरबस ए320 नियो विमान के मुख्य कंप्यूटर और हाइड्रोलिक सिस्टम की तकनीकी खराबी का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विमानन विशेषज्ञ सबसे बड़ा सवाल यह उठा रहे हैं कि इतने बड़े खतरे के बावजूद गंतव्य तक यात्रा जारी क्यों रखी गई और तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग क्यों नहीं कराई गई।
एविएशन के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और डीजीसीए /आइसीएओ के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि उड़ान के दौरान विमान का नियंत्रण चार सेकंड के लिए भी पूरी तरह खत्म होता है, तो कैप्टन को तुरंत मेडे या पैन- पैन सिग्नल जारी कर निकटतम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी अनिवार्य होती है।
विमानन विशेषज्ञ मार्क मार्टिन नशे की हालत में सिचुएशनल अवेयरनेस प्रभावित होने के कारण पायलट द्वारा साइड-स्टिक पर गलत इनपुट देने का अंदेशा जताते हैं। मार्टिन कहते हैं कि इमरजेंसी लैंडिंग नहीं कराके पायलट ने यात्रियों की जान जोखिम में डालकर दिल्ली तक उड़ान जारी रखा जो बेहद गंभीर लापरवाही है।
पूर्व की इमरजेंसी लैंडिंग से जुड़ी घटनाएं
विमानन सुरक्षा मानकों का पालन कैसे किया जाता है, इसका बड़ा उदाहरण जनवरी 2023 में तब देखने को मिला था जब दिल्ली से पेरिस जा रही एयर इंडिया की उड़ान एआइ-143 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) में मामूली तकनीकी खराबी का अंदेशा होते ही कैप्टन ने तुरंत विमान मोड़ा और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
इसी तरह, नवंबर 2021 में पुणे से जयपुर जा रही इंडिगो की उड़ान के एयरबस ए320 विमान के एक इंजन में तकनीकी खराबी (ग्लिच) महसूस होते ही एसओपी का पालन करते हुए विमान को मुंबई डायवर्ट कर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी।
चार सेकेंड की थ्यौरी पर भी सवाल
मार्क मार्टिन का कहना है कि ए320नियो में तीन स्वतंत्र हाइड्रोलिक और कंप्यूटर बैकअप सिस्टम होते हैं, जिनका एक साथ चार सेकंड के लिए ठप होना और फिर बिना रीसेट के खुद-ब-खुद सामान्य हो जाना तकनीकी रूप से लगभग नामुमकिन है। अंदेशा है कि क्रू की मानवीय गलती और नशे की लापरवाही को ढकने के लिए एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरर पर तकनीकी दोष मढ़ने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल विमानन दुर्घटना जांच ब्यूरो और एयरबस की टीम ब्लैक बाक्स (डीएफडीआर और सीवीआर) का डेटा खंगाल रही है, जिसके बाद ही साफ होगा कि साइड स्टिक पर पायलट का हाथ लगा था या वाकई कोई तकनीकी ग्लिच था।
इमरजेंसी लैंडिंग को लेकर क्या है डीजीसीए के मानक
तत्काल निर्णय: उड़ान के दौरान यदि विमान का कोई मुख्य सिस्टम (जैसे आटोपायलट, हाइड्रोलिक्स, या फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर) फेल होता है या विमान पर से नियंत्रण खत्म होता है, तो मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पायलट-इन-कमांड को 'मेडे' (आपातकाल) या 'पैन-पैन' (तत्काल सहायता) घोषित करना अनिवार्य है।
निकटतम उपयुक्त एयरपोर्ट पर डायवर्जन: डीजीसीए और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों के तहत, उड़ान के दौरान किसी भी प्रमुख सिस्टम में खराबी आने पर क्रू को निर्धारित गंतव्य तक उड़ान जारी रखने के बजाय निकटतम निकटतम एयरपोर्ट पर तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग करानी होती है। जोखिम में यात्रा जारी रखना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
कॉकपिट क्रू और एसओपी का कड़ाई से पालन: कॉकपिट में यदि पायलट या को-पायलट में से किसी को भी सिस्टम फेलियर या टर्बुलेंस का अहसास होता है, तो क्विक रेफरेंस हैंडबुक (क्यूआरएच) के अनुपालन के साथ एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को तुरंत सूचना देनी होती है।
