दर्द की दवा से डायलिसिस तक की नौबत, AIIMS की बड़ी चेतावनी; बिना सलाह पेनकिलर लेना किडनी के लिए घातक
दर्द निवारक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी और क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बिना सोचे समझे पेनकिलर लेना किडनी के लिए घातक। फोटो: सांकेतिक
HighLights
पेनकिलर का अनियंत्रित उपयोग किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाता है
डाइक्लोफेनाक, इबुप्रोफेन जैसी दवाएं AKI का कारण बन सकती हैं
बिना चिकित्सकीय सलाह पेनकिलर लेने से बचें, डॉक्टर से परामर्श करें
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दर्द से तुरंत राहत के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह पेनकिलर लेना किडनी के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दिल्ली में जिम जाने वाले युवाओं से लेकर लंबे समय तक कार्यालय में बैठने वालों और माहवारी के दर्द से परेशान महिलाओं में बार-बार पेनकिलर लेने का चलन देखा जा रहा है।
एम्स के नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों ने चेताया है कि डाइक्लोफेनाक, इबुप्रोफेन और केटोरोलैक जैसी दवाओं का अनियंत्रित या लंबे समय तक इस्तेमाल एक्यूट किडनी इंजरी का कारण बन सकता है और गंभीर स्थिति में डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।
बार-बार पेनकिलर लेना किडनी को नुकसान
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अपने सर्कुलर में नान-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) और एंटीबायोटिक के अनियंत्रित, बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। नियामक ने ऐसे इस्तेमाल से किडनी संबंधी जटिलताओं और क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है।
एम्स के नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में जिम में व्यायाम करने वाले युवाओं में मांसपेशियों के दर्द, कार्यालय में लंबे समय तक बैठने से कमर दर्द, महिलाओं में माहवारी के दर्द और खेल के दौरान चोट लगने पर पेनकिलर लेने का चलन देखा जाता है।
पानी की कमी में बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार एनएसएआईडी दवाएं किडनी में रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद करने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन के प्रभाव को कम करती हैं। ऐसे में शरीर में पानी की कमी होने पर किडनी में रक्त का प्रवाह घट सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (एकेआई) हो सकती है।
दिल्ली में गर्मी के दौरान अधिक पसीना निकलने, व्यायाम या बीमारी के कारण शरीर में पानी की कमी हो और उसी समय पेनकिलर लिया जाए तो किडनी पर दबाव बढ़ सकता है।
पहले से किडनी की बीमारी, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। एक ही दिन में जरूरत से अधिक खुराक लेना भी खतरा बढ़ा सकता है।
बार-बार चोट से डायलिसिस तक नौबत
विशेषज्ञों के मुताबिक, एक्यूट किडनी इंजरी की समस्या बार-बार होने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। गंभीर मामलों में डायलिसिस की आवश्यकता तक पड़ सकती है।
भारत में पहले से ही क्रॉनिक किडनी डिजीज का बड़ा बोझ है। 2023 के वैश्विक आकलन के अनुसार, देश में करीब 13.8 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित थे।
वर्ष 2025 में प्रकाशित व्यवस्थित समीक्षा में भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज की व्यापकता 13.24 प्रतिशत मिली। 2011-17 में यह 11.12 प्रतिशत और 2018-23 में 16.38 प्रतिशत रही।
एम्स में हर साल 140 प्रत्यारोपण
एम्स का नेफ्रोलॉजी विभाग वर्ष 1969 से किडनी रोगियों के उपचार से जुड़ा है। विभाग में नियमित हेमोडायलिसिस के नौ स्टेशन और संक्रमण वाले मरीजों के लिए अलग से चार हेमोडायलिसिस स्टेशन हैं। इसके अलावा तीव्र इंटरमिटेंट पेरिटोनियल डायलिसिस की दो सुविधाएं भी हैं।
विभाग हर वर्ष करीब 140 किडनी प्रत्यारोपण करता है। एनसीआर समेत देशभर से गंभीर किडनी मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं।
पेनकिलर से पेट और हृदय पर असर
एम्स विशेषज्ञों के अनुसार, एनएसएआइडी दवाओं का नुकसान केवल किडनी तक सीमित नहीं है। इनके लंबे समय तक या अनियंत्रित इस्तेमाल से पेट में अल्सर और रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मरीजों में रक्तचाप बढ़ने और हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ता है।
इसलिए इन दवाओं को सामान्य दर्द की दवा समझकर बार-बार लेना उचित नहीं है।
एंटीबायोटिक भी खुद से नहीं लें
सीडीएससीओ ने एंटीबायोटिक के खुद से इस्तेमाल से भी बचने की सलाह दी है। कई एंटीबायोटिक शेड्यूल एच-1 के अंतर्गत आते हैं और इनके लिए पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के पर्चे की आवश्यकता होती है।
सामान्य वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। अनावश्यक इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) बढ़ने का खतरा रहता है।
कम खुराक, कम अवधि का नियम
सीडीएससीओ ने चिकित्सकों को दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार करने और एनएसएआईडी की सबसे कम प्रभावी खुराक सबसे कम आवश्यक अवधि तक देने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दर्द बार-बार होने पर खुद से पेनकिलर लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। खासकर किडनी, हृदय, उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर बीमारी वाले मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह ऐसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए।
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