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डेंगू के खिलाफ AIIMS का बड़ा शोध, इलाज को लेकर जगी नई उम्मीद; दवा बनाने का खुला रास्ता

Published: Fri, 16 Oct 2026 09:51 PM (IST)

एम्स के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि शरीर के कुछ छोटे कण डेंगू वायरस की वृद्धि को प्रभावित ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. एम्स शोध: शरीर के कण डेंगू वायरस वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।

  2. नई दवा विकास की संभावना, विशिष्ट उपचार की उम्मीद बढ़ी।

  3. दवा बनने में समय लगेगा, क्लिनिकल ट्रायल आवश्यक।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। डेंगू के वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकने वाली नई दवा विकसित करने का रास्ता निकल सकता है।

एम्स के वैज्ञानिकों ने शोध में पता लगाया है कि शरीर में मौजूद कुछ छोटे कण डेंगू वायरस को बढ़ने में मदद करते हैं, जबकि कुछ उसकी बढ़ोतरी रोकते हैं। इस खोज से भविष्य में डेंगू के लिए नई दवा बनाने की उम्मीद जगी है।

डेंगू के लिए कोई विशेष दवा नहीं

शोध के निष्कर्ष 14 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनएआर मालिक्यूलर मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। अभी डेंगू के वायरस को सीधे निशाना बनाने वाली व्यापक रूप से स्वीकृत कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।

मरीजों को बुखार और दूसरे लक्षणों से राहत देने के साथ उनकी स्थिति के अनुसार उपचार दिया जाता है। ऐसे में वायरस की बढ़ोतरी रोकने का नया तरीका खोजना महत्वपूर्ण है।

शरीर के छोटे कणों की भूमिका

एम्स के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में डा. भूपेंद्र वर्मा की अगुवाई में हुए शोध में टीआरएनए नाम के तत्व का अध्ययन किया गया। यह शरीर की कोशिकाओं में प्रोटीन बनाने में मदद करता है। संक्रमण के दौरान इसके कुछ छोटे टुकड़े बनते हैं, जिन्हें टीआरएफ कहा जाता है।

शोध में पता चला कि कुछ टुकड़े डेंगू वायरस को बढ़ने में मदद करते हैं, जबकि कुछ उसकी बढ़ोतरी रोकने में भूमिका निभाते हैं।

दवा बनाने की संभावना

शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में विशेष अणुओं की मदद से कुछ आरएनए टुकड़ों की गतिविधि रोककर वायरस की बढ़ोतरी पर उसका असर देखा।

शोध में कोशिकाओं के भीतर मौजूद एक संकेत तंत्र की भूमिका भी सामने आई, जो वायरस की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। इन प्रक्रियाओं को समझकर भविष्य में वायरस को निशाना बनाने वाली दवा विकसित करने की संभावना तलाशी जा सकती है।

दवा बनने में लगेगा समय

इस शोध से जुड़ी परियोजना 2023 में शुरू हुई थी और इसकी निर्धारित अवधि 2026 तक है। इससे पहले टीम का शोध अगस्त 2024 में साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ था। शोध में डा. वर्मा के साथ दीक्षा मधरी, रिया राय, अरीबा अजीज, प्रीति सोखल और सुशांत फड़नीस शामिल रहे।

दीक्षा मधरी और रिया राय की भी इसमें प्रमुख भूमिका रही। डा. भूपेंद्र वर्मा के अनुसार मनुष्यों पर इसकी प्रभावशीलता का अध्ययन होना बाकी है। दवा विकसित करने, उसकी सुरक्षा जांचने और आवश्यक क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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