अब चुटकियों में त्वचा रोग की पहचान, AIIMS और Google ने बनाए दो AI टूल 'इंडसडर्मा' और 'आरोग्यम'
एम्स और गूगल ने मिलकर 'इंडसडर्मा' और 'आरोग्यम' नामक दो एआई टूल विकसित किए हैं। ये टूल त्वचा रोगों की ...और पढ़ें

एम्स और गूगल ने मिलकर बनाया इंडसडर्मा। फोटो: इंटरनेट
HighLights
एम्स-गूगल ने 'इंडसडर्मा' और 'आरोग्यम' एआई टूल विकसित किए
'इंडसडर्मा' भारतीय त्वचा रोगों की पहचान में सहायक होगा
'आरोग्यम' गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने में मदद करेगा
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। त्वचा पर दाने, खुजली, लालिमा या असामान्य निशान दिखाई देने पर बीमारी की पहचान करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में एम्स और गूगल की पहल चिकित्सकों के लिए मददगार बन रही है।
दोनों ने मिलकर ‘इंडसडर्मा’ एआइ टूल विकसित किया है जो मरीज की त्वचा की तस्वीर और लक्षणों से जुड़ी जानकारी के आधार पर त्वचा रोगों की पहचान में चिकित्सकों की सहायता करेगा।
विशेष यह कि यह है कि इसे भारतीय जनता की त्वचा के रंग और यहां पाई जाने वाली बीमारियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एम्स में इसका पायलट प्रोजेक्ट जारी है।
भारतीय त्वचा के अनुसार बीमारी पहचानने में मदद
इंडसडर्मा में त्वचा की तस्वीर के साथ मरीज की उम्र, लक्षणों और बीमारी की अवधि जैसी जानकारी का उपयोग करने पर यह चिकित्सकों को संभावित बीमारी समझने, आगे की जांच की आवश्यकता तय करने और विशेषज्ञ के पास भेजने के बारे में निर्णय लेने में मदद देगा।
ऐसे में यह तकनीक उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी उपयोगी हो सकती है, जहां त्वचा रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सीमित है। हालांकि, मरीज की जांच और उपचार का निर्णय चिकित्सक ही करेंगे।
गंभीर मरीजों को पहले देखने में मिलेगी मदद
यही नहीं डाक्टरों को एम्स और गूगल का ‘आरोग्यम’ एआइ टूल से ओपीडी में मरीजों की आरंभिक चिकित्सीय जानकारी और जांच के आधार पर यह समझने में सहायता मिलेगी कि किस मरीज को पहले देखना आवश्यक और किसे बाद में।
इससे गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने और उनकी प्रतीक्षा अवधि घटाने जा सकेगी। एम्स से मिली जाने के अनुसार गूगल की इस पहल का लक्ष्य विशेषज्ञ को दिखाने से पहले मरीज का प्रतीक्षा समय 40 प्रतिशत तक कम करना है।
प्रतिदिन 15 हजार मरीजों तक पहुंचने की तैयारी
एम्स और गूगल की इस पहल में दोनों एआइ टूल से प्रतिदिन 15 हजार तक ओपीडी मरीजों की स्थिति का आकलन करने की क्षमता विकसित करने की तैयारी है। दोनों टूल का एम्स में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है।
