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AIIA और IIT दिल्ली के बीच MoU अगले 5 साल के लिए बढ़ा, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में रिसर्च को मिलेगी गति

Published: Sat, 18 Jul 2026 03:09 PM (IST)

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) और आईआईटी दिल्ली के बीच अनुसंधान व शैक्षणिक सहयोग का समझौता ज्ञापन (MoU) अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।

AIIA और IIT दिल्ली के बीच MoU अगले 5 साल के लिए बढ़ा। फोटो: आर्काइव

AIIA और IIT दिल्ली के बीच MoU अगले 5 साल के लिए बढ़ा। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. AIIA-IIT दिल्ली MoU अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा

  2. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

  3. 'सौश्रुतम् 2026' संगोष्ठी में हुई इसकी घोषणा

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) और आईआईटी दिल्ली के बीच अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक सहयोग को लेकर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।

इसकी घोषणा एआईआईए में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम् 2026’ के समापन समारोह में शुक्रवार को की गई। संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) पीके प्रजापति ने कहा कि यह पहल आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के बीच अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने का काम करेगी।

पांच साल और बढ़ी एआईआईए-आईआईटी दिल्ली की साझेदारी

15 से 17 जुलाई तक आयोजित संगोष्ठी के समापन समारोह में राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) की अध्यक्षा वैद्य मनीषा कोठेकर और दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

वहीं, एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया और पद्मश्री प्रो. मनोरंजन साहू विशिष्ट अतिथि रहे। प्रो. पीके प्रजापति ने कहा कि आईआईटी दिल्ली के साथ एमओयू का विस्तार अनुसंधान, नवाचार और शल्य शिक्षा को और मजबूत करेगा।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद को बढ़ावा

उन्होंने बताया कि ‘सौश्रुतम् 2026’ की परिकल्पना वैज्ञानिक संवाद को प्रोत्साहित करने, साक्ष्य आधारित आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा को बढ़ावा देने, तकनीकी नवाचारों को मंच प्रदान करने और आचार्य सुश्रुत की शल्य परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से की गई है।

‘आयुषवल्लरी’ और नेत्र रोगों पर पुस्तक का विमोचन

समारोह के दौरान संस्थान की वार्षिक हिंदी पत्रिका ‘आयुषवल्लरी’ के तीसरे अंक, ‘सौश्रुतम् 2026’ स्मारिका और ‘नेत्र रोग्यः सामान्य जानकारी एवं निवारण’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

संस्थान के अनुसार, इस पुस्तक का उद्देश्य आम लोगों को नेत्र रोगों के प्रति जागरूक करना और सरल भाषा में वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

दुनिया भर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) योगेश बडवे ने कहा कि ऐसी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की गुणवत्ता बढ़ाने और इसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

संगोष्ठी में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत सहित कई देशों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इसके अलावा एम्स, एसजीपीजीआई लखनऊ, जीएमसी अगरतला और सर गंगाराम अस्पताल के आधुनिक शल्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच संवाद को मजबूती मिली।

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