राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : एक ओर दिल्ली सरकार यमुना को साफ करने के लिए सबसे बड़े नजफगढ़ नाले पर इंटरसेप्टर सीवर सिस्टम लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी कर रही है, वहीं इस नाले को साफ करने के लिए विशेषज्ञों ने एक आसान तरीका सुझाया है।

यमुना जिये अभियान ने उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना को भेजे अपने एक पत्र में इस तरीके से अवगत कराया है। फाउंडेशन फॉर ग्रीनटेक एन्वायरमेंटल सिस्टम के असित नेमा और टोकयो इंजीनियरिंग कंसलटेंट्स के डॉ. ललित अग्रवाल द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नजफगढ़ नाले का बेहतर प्रबंधन करके प्रदूषण की मात्रा बेहद कम की जा सकती है।

इसके लिए नजफगढ़ नाले के अवरोधक तैयार करने होंगे, ताकि पानी वहां पर रुक जाए और फिर एक साथ तेजी से बहे। इस तरह जगह-जगह अवरोधक बनाकर पानी रोक कर बहाव को तेज करना होगा। यह सर्वविदित है कि पानी का बहाव जितना तेज होगा, उतनी पानी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ती जाएगी। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में इसी पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है, इससे प्रदूषक तत्व नीचे बैठ जाते हैं और साफ पानी बाहर निकल जाता है।

इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए यमुना जिये अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा ने बताया कि नजफगढ़ नाला, जिसमें दिल्ली के लगभग बड़े नाले गिरते हैं, को कभी साहिबी नदी के रूप में जाना जाता था। इस नदी का बहाव ऐसा था कि यह सीधे यमुना में गिरती थी। धीरे धीरे नदी तो समाप्त हो गई और नाले का रूप ले लिया। पानी का बहाव भी धीमा हो गया। यदि इसका बहाव तेज होगा तो प्रदूषण की मात्रा काफी हो जाएगी।

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