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मोबाइल टावरों से आरआरयू चोरी कर हांगकांग भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

Published: Tue, 14 Jul 2026 05:33 PM (IST)

क्राइम ब्रांच ने मोबाइल टावरों से रिमोट रेडियो यूनिट्स (आरआरयू) चुराकर नकली इनवाइस के जरिए हांगकांग एक्सपोर्ट करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

मोबाइल टावराें से आरआरयू चोरी कर हांगकांग में बेचने वाले गिरोह के चार गुर्गे गिरफ्तार। जागरण

मोबाइल टावराें से आरआरयू चोरी कर हांगकांग में बेचने वाले गिरोह के चार गुर्गे गिरफ्तार। जागरण

HighLights

  1. मोबाइल टावरों से आरआरयू चोरी कर हांगकांग एक्सपोर्ट करने वाला गिरोह पकड़ा।

  2. चार आरोपित गिरफ्तार, 43 चोरी हुए रिमोट रेडियो यूनिट्स बरामद।

  3. गिरोह ने 8-9 महीनों में 800 से अधिक आरआरयू विदेश भेजे।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मोबाइल टावरों से रिमोट रेडियो यूनिट्स (आरआयू) चोरी कर नकली इनवाइस बनाकर विदेश में एक्सपोर्ट करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर क्राइम ब्रांच ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान हर्ष विहार के हेमंत गुप्ता, संगम विहार के विकास पासवान, गाजियाबाद के फरीद और मेरठ के शेर मोहम्मद के रूप में हुई है।

इनके कब्जे से लगभग 70 लाख कीमत की 43 चोरी हुई आरआरयू बरामद की गई हैं। यह गिरोह चोरी किए गए टेलीकाम इक्विपमेंट को नकली इनवाइस और ''पावर सप्लाई पाइंट'' के तौर पर गलत जानकारी देकर एयरलाइन कार्गो के जरिए हांगकांग एक्सपोर्ट कर रहा था।

पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा में आरआरयू चोरी के 19 मामले सुलझाने का दावा किया है। पुलिस इनसे पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी है।

उपायुक्त आदित्य गौतम के मुताबिक, कई राज्यों में टेलीकाम टावरों से आरआरयू की बढ़ती चोरी के बारे में मिली गुप्त जानकारी पर कार्रवाई करते हुए टीम ने जानकारी जुटाई, जिससे पता चला कि चोरी किए गए आरआरयू को दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में जमा किया जा रहा था और उन्हें हांगकांग में एक्सपोर्ट किया जा रहा था।

चोरी का सामान महिपालपुर में काम करने वाली कूरियर एजेंसियों के जरिए एयरलाइन कार्गो से एक्सपोर्ट किया जाता था। जांच के दौरान 10 जुलाई को हेड कांस्टेबल नेमी चंद और कांस्टेबल प्रवीण को गुप्त जानकारी मिली कि एक गिरोह चोरी की आरआरयू की एक बड़ी खेप को विदेश भेजने के लिए महिपालपुर की एक कूरियर एजेंसी ले जा रहे हैं।

सूचना पर एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में और इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित टीम ने महिपालपुर में एक गोदाम और कूरियर आफिस के पास जाल बिछाया और हेमंत गुप्ता वैन में 19 चोरी की आरआरयू ले जाते हुए पकड़ा गया। इसके कुछ ही देर बाद फरीद और शेर मोहम्मद एक स्विफ्ट कार में नौ और चोरी की आरआरयू लेकर गोदाम पहुंचे।

बाद में गोदाम की तलाशी लेने पर चार और आरआरयू बरामद हुईं। आपरेशन के दौरान एक पोर्टर भी दूसरी वैन में 11 चोरी की आरआरयू लेकर पहुंचा। ये आरआरयू फुरकान खान के कहने पर आरोपित विकास पासवान को पहुंचाई जानी थीं। इस तरह कुल 43 चोरी की आरआरयू बरामद हुईं।

जांच से पता चला है कि बरामद आरआरयू दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लगे एयरटेल मोबाइल टावरों से चोरी किए गए थे। अब तक, इन राज्यों में दर्ज चोरी के 19 मामलों को बरामद सामान से जोड़ा गया है, जबकि अन्य मामलों से संबंध स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं।

800 से अधिक चोरी के आरआरयू हांगकांग भेज चुका गिरोह

यह सिंडिकेट लगभग 8-9 महीनों से सक्रिय है और पुलिस का अनुमान है कि इस दौरान इसने 800 से अधिक चोरी के आरआरयू को अवैध रूप से हांगकांग भेजा है। आरोपित विकास पासवान इस गिरोह का मुख्य सरगना है, जो भारी अवैध मुनाफे के लिए दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके और उत्तर प्रदेश के मेरठ में काम करने वाले साथियों के जरिए चोरी के आरआरयू को लेने, स्टोर करने और एक्सपोर्ट करने का काम करता था।

क्या होता होता है आरआरयू?

आरआरयू जिन्हें रिमोट रेडियो हेड (आरआरएच) भी कहा जाता है, मोबाइल टेलीकाम इंफ्रास्ट्रक्चर के अहम हिस्से हैं। वायरलेस बेस स्टेशनों पर लगाए गए ये यूनिट वायस और डेटा सेवाओं के ट्रांसमिशन और रिसेप्शन में मदद करते हैं। इन यूनिट्स की चोरी से टेलीकाम सेवाओं में बड़ी रुकावट आती है और सर्विस प्रोवाइडर्स को भारी आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि नेटवर्क कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए उन्हें चोरी हुए उपकरणों को बदलना पड़ता है।

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