नई दिल्ली, अरुण श्रीवास्तव। TIPS for Civil Services Exam पिछले कई वर्षों से सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की लगातार बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि इस सेवा के प्रति युवाओं का आकर्षण कितना अधिक है। देखा जाए तो इसके कई कारण समझ में आते हैं। दरअसल, निजी क्षेत्र की बड़ी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऊंचे वेतन वाले आफर अब तमाम युवाओं को उतना नहीं लुभाते। यह भी कि ऐसे आफर गिने-चुने ही होते हैं और जब पैकेज बड़ा होता है, तो जाहिर है उस पद से अपेक्षाएं भी बहुत रहती हैं। एक तरह से इस तरह की नौकरियां तलवार की धार पर चलने की तरह ही होती हैं। जब कभी प्रदर्शन अपेक्षाओं से अधिक नहीं हो पाता या कम होता है, तो ऐसी नौकरी पर तलवार लटकने लगती है। ऐसे में करियर के बीच में असुरक्षा की आशंका हमेशा बनी रहती है।

यही कारण है कि आइआइटी, आइआइएम या इनके समकक्ष अन्य प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों से निकले युवाओं को बेशक शुरुआत में ही बड़ा पैकेज मिल जाता है, पर कुछ ही वर्षों में उन्हें इसकी असलियत का पता चल जाता है। नतीजा यह होता है कि कुछ वर्षों में ही वे नौकरी छोड़कर या विदेश से लौटकर आइएएस की तैयारी करने लगते हैं और अपनी सूझबूझ से आसानी से कामयाबी भी हासिल कर लेते हैं। ऐसे युवा लंबी-चौड़ी स्ट्रेटेजी बनाने के बजाय सटीक अध्ययन की नीति बनाते और उस पर अमल करते हैं। वर्षों से आइएएस को लक्ष्य मानकर दिन-रात एक कर रहे अधिकतर युवाओं को कम समय की तैयारी में हासिल की गई उनकी कामयाबी हैरान भी करती है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर वे कुछ ही समय की तैयारी में कैसे इस परीक्षा का चक्रव्यूह तोड़ने में सफल हो जाते हैं। दरअसल, उनकी कामयाबी का मंत्र बहुत सीधा होता है। वे सब कुछ और ज्यादा से ज्यादा पढ़ने के बजाय सिर्फ सिलेबस पर ही फोकस करते हैं। उससे जरा भी नहीं भटकते।

लक्ष्य के प्रति ईमानदारी : काउंसिलिंग के दौरान मेरे पास बड़ी संख्या में ऐसे सवाल आते हैं, जिनमें आइएएस बनने की इच्छा प्रकट की गई होती है और इसके लिए समुचित मार्गदर्शन करने का आग्रह होता है। कुछ का कहना होता है कि आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न होने के कारण वे कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते, जबकि कुछ संसाधनों की कमी और तैयारी के लिए उपयुक्त माहौल न होने की शिकायत करते हैं। दरअसल, इस तरह की बातें अक्सर वही करते हैं, जो दूसरों को देखकर, उनसे प्रेरित होकर आइएएस बनने का सपना देखने लगते हैं। उन्हें लगता है कि संसाधन न होना या कम होना या फिर कोचिंग न कर पाना ही उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है। वास्तव में ऐसा हरगिज नहीं है। दरअसल, यदि आप खुद के प्रति ईमानदार हैं। सूझबूझ के साथ अपने बारे में निर्णय लेने में समर्थ हैं, तो आप शायद ही कोई बहाना बनाएंगे। संसाधनों की कमी को दोष देने के बजाय आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते ढूंढ़ ही लेंगे।

आत्मविश्वास के साथ बढ़ाएं कदम

  • सपने देखने और उनमें खोये रहने के बजाय लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास करें
  • संसाधनों की कमी और पढ़ाई का अच्छा माहौल न होने को दोष देने के बजाय सकारात्मकता के साथ रास्ते तलाशें
  • शुरुआती प्रयासों में सफलता न मिलने पर देखें, विचारें कि आखिर चूक कहां हो गई। उस चूक को दूर करते हुए फिर से प्रयास करें
  • ज्यादा से ज्यादा किताबें जुटाने के बजाय सीमित संख्या में उन प्रामाणिक अध्ययन स्रोतों को आधार बनाएं, जो सिलेबस को कवर करते हों

खुद पर भरोसा : कुछ समय पहले घोषित पिछले वर्ष की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम के अनुसार उच्च स्थान पाने वाले अधिकतर अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने स्वाध्याय पर ही भरोसा किया। सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न चरणों की तैयारी के लिए उन्होंने किसी कोचिंग की मदद नहीं ली। इसमें कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी थे, जिन्हें तीसरे या चौथे और अंतिम प्रयास में कामयाबी मिली। ऐसे युवाओं ने पहले सफलता न मिलने के कारणों को तलाशने की कोशिश की। अपनी कमजोरियों/कमियों को जाना, समझा और उन्हें दूर करके आगे की लड़ाई लड़ी और फिर जीत हासिल की। यदि आप भी अगले साल या उसके बाद के वर्षों में सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होने की योजना बना रहे हैं, तो इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। सबसे पहले तो इस परीक्षा के स्वरूप को समझते हुए इसके लिए अपनी सक्षमता और इसके लिए अपेक्षित धैर्य की परख कर लें। लगता है कि आपको इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, तो इसके लिए अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर लें। कठिनाइयों, संसाधनों की कमी को दरकिनार करते हुए जज्बे के साथ आगे बढ़ें। हो सकता है कि स्वजन भी आपके निर्णय से सहमत न हों। ऐसे में आप उन्हें समझाकर भरोसे में लेने का प्रयास करें। परिवार का हर सदस्य आपसे प्यार करता है और आपको आगे बढ़ता हुआ ही देखना चाहता है। आपकी खुशी में ही उनकी खुशी होती है।

छोटे-छोटे कदम : सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ सपनों में खोये रहना और उसे पाने के लिए समुचित कर्म न करने से सपना कभी भी पूरा नहीं हो सकता। यदि आप वाकई गंभीर हैं, तो अपने सपने को व्यावहारिक लक्ष्य में बदल लें। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में छोटे-छोटे कदम बढ़ाएं। पिछले रविवार (10 अक्टूबर) को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन (जीएस) प्रश्नपत्र में पूछे गए तमाम प्रश्न एनसीईआरटी की किताबों पर आधारित बताए जा रहे हैं। ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है। हर साल ऐसा ही होता है। यही कारण है कि सभी सफल अभ्यर्थी एनसीईआरटी की किताबों (छठी से बारहवीं की लगभग सभी विषयों की) को रामबाण बताते हैं।

कम में ज्यादा : आप यह न सोचें कि आपके पास पूरी किताबें नहीं हैं, इसलिए आप अच्छी तरह तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें सर्वसुलभ हैं। आप इन्हें हासिल करके इन्हें अच्छी तरह समझते हुए पढ़ें। रटे नहीं। तथ्यों के साथ धारणाओं को समझें। जेहन में क्या, क्यों, कैसे की उत्सुकता रखकर अध्ययन को आगे बढ़ाएंगे, तो रटने की नौबत नहीं आएगी। गौर करेंगे, तो पाएंगे कि सिविल सेवा प्रारंभिक से लेकर मुख्य परीक्षा और यहां तक कि साक्षात्कार में भी तथ्यों की नहीं, बल्कि धारणाओं की समझ और सूझबूझ की परीक्षा ली जाती है। यही कारण है कि सवाल बहुत घुमा-फिराकर पूछे जाते हैं। आपने धारणाओं को समझा होगा, तो सवाल चाहे जैसे पूछे जाएं, आपको जवाब देने में परेशानी नहीं होगी। ज्यादा से ज्यादा किताबें और संसाधन जुटाने के बजाय उतने ही प्रामाणिक साधन जुटाएं, जिनसे पाठ्यक्रम पूरा कवर हो जाता हो।

जरूरी नहीं कोचिंग का फेर : आप कोचिंग नहीं कर पा रहे हैं, इस बात को लेकर कतई परेशान न हों। खुद को भटकाव और भ्रम से बचाते हुए आत्मविश्वास के साथ नियमित रूप से फोकस्ड अध्ययन करें। आवश्यकतानुसार आनलाइन (यूट्यूब, इंटरनेट आदि से) भी प्रामाणिक सामग्री जुटाने में सहयोग ले सकते हैं। एक बार सिलेबस पूरा कर लेने के बाद जब रिवीजन करना आरंभ करें, तो अभ्यास प्रश्नों को भी हल करना आरंभ कर दें। इससे आपको अपनी तैयारी का आकलन करने में मदद मिलेगी। 80 फीसद प्रश्नों के सही उत्तर नहीं दे पा रहे हैं, तो विचार करें कि आखिर आप कहां-कहां कमजोर पड़ रहे हैं। उन हिस्सों की पहचान करके उनसे दूर भागने के बजाय उनमें खुद को मजबूत बनाने का हरसंभव प्रयास करें। हमेशा चिड़िया की आंख की तरह लक्ष्य को हासिल करने में नजर रखेंगे, तो खुद को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

Edited By: Sanjay Pokhriyal