नई दिल्ली/गुरुग्राम, जेएनएन। आमतौर पर हमारा दिल एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है। ब्रैडीकार्डिया जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में जब हृदय सिकुड़ता है तो हर सिकुडऩ के साथ वह शरीर को पर्याप्त आक्सीजन युक्त रक्त पंप नहीं कर पाता है। ऐसा हृदय की विद्युत प्रणाली में किसी गड़बड़ी के कारण हो सकता है, जिसका अर्थ यह है कि हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर ठीक से काम नहीं कर रहा है या हृदय के विद्युत मार्ग में कोई रुकावट आ रही है।

लक्षण:

ब्रैडीकार्डिया के कारण कोई भी लक्षण नहीं हो सकता है। हालांकि इसके कारण मरीज को निम्न समस्याएं हो सकती हैं।

  • थकान या कमजोरी महसूस करना
  • चक्कर आना
  • भ्रम जैसी स्थिति होना
  • बेहोशी या बेहोशी के दौरे आना
  • सांस फूलना
  • व्यायाम करते समय कठिनाई
  • कार्डियक अरेस्ट (बहुत गंभीर मामलों में)

कारण:

  • दिल के माध्यम से गुजरने वाली किसी भी विद्युत पथ में कोई समस्या होना
  • दिल का दौरा, किसी चिकित्सीय प्रक्रिया के कारण हृदय को क्षति पहुंचना
  • हृदय की मांसपेशी की सूजन
  • थायराइड की कार्यप्रणाली में कमी
  • रक्त में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
  • जन्मजात हृदय दोष
  • बीटा-ब्लाकर्स और हार्ट रिदम की दवाइयों जैसी कुछ दवाइयां

निदान:

ब्रैडीकार्डिया का निदान करने के लिए आमतौर पर डाक्टर पहले रोगी के चिकित्सा इतिहास की जानकारी लेते हैं और फिर शारीरिक परीक्षण करते हैं। यदि रोगी की हृदय गति असामान्य पायी जाती है तो चिकित्सक इसकी पुष्टि करने के लिए इलेक्ट्रोकाॢडयोग्राम (ईकेजी) कराने की सलाह दे सकते हैं। ईकेजी एक दर्द रहित प्रक्रिया है, जो हृदय की विद्युत गतिविधि को रिकार्ड करती है। हृदय की विद्युत प्रणाली को देखने के लिए एक इलेक्ट्रोफिजियोलाजी अध्ययन भी किया जा सकता है।

इलाज:

ब्रैडीकार्डिया के उपचार में एक रोगी से दूसरे रोगी में अंतर हो सकता है और यह उनकी स्थिति, रोग की गंभीरता और कारण पर निर्भर करेगा। उपचार के विकल्पों में वर्तमान दवा को समायोजित करना और कभी-कभी सर्जरी शामिल हो सकती है। यदि हृदय की विद्युत प्रणाली के भीतर क्षति के कारण हृदय गति धीमी हो रही है तो पेसमेकर नामक एक इंप्लांटेबल हार्ट डिवाइस लगाना पड़ सकता है। यह एक छोटा उपकरण हैं, जिन्हें त्वचा के नीचे, अक्सर रोगी की छाती के बाईं या दाईं ओर कालरबोन के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे हृदय की लय को बहाल करने में मदद मिलती है। पेसमेकर हृदय गति बढ़ाने के लिए हृदय को छोटे विद्युत संकेत भेजकर ब्रैडीकार्डिया के लक्षणों को दूर कर सकता है।

पारंपरिक उपचार के नुकसान:

पेसमेकर या आईसीडी सर्जरी से संबंधित जटिलताएं असामान्य हैं, लेकिन इसमें शामिल हो सकते हैं...

  • दिल में जहां डिवाइस लगाया गया है उस जगह के पास संक्रमण 
  • पेसमेकर लगाने की जगह पर सूजन, चोट या खून का निकलना
  • पेसमेकर की जगह के पास रक्त के थक्के बनना
  • पेसमेकर के पास रक्त वाहिकाओं या नसों को नुकसान
  • फेफड़े और छाती की दीवार के बीच की जगह में रक्त (हेमोथोरैक्स) जमा होना
  • डिवाइस या लीड का मूवमेंट (अपनी जगह से हटना)

नया उपचार है लीडलेस पेसमेकर:

पारंपरिक पेसमेकर से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करने या समाप्त करने के लिए लीडलेस पेसमेकर 'माइक्राÓ को डिजाइन किया गया है। यह एक छोटा आत्मनिर्भर उपकरण है, जिसे हृदय के दाहिने वेंट्रिकल में डाला जाता है। पारंपरिक पेसमेकर के विपरीत, लीडलेस पेसमेकर को सॢजकल पाकेट और पेसिंग लीड की आवश्यकता के बगैर सीधे हृदय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह उपकरण पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में बहुत छोटा है। डिवाइस को एक नस के माध्यम से प्रत्यारोपित किया जाता है, जो जांघ के ऊपरी हिस्से की बाहरी सतह के काफी करीब से गुजरती है। प्रत्यारोपण प्रक्रिया में पारंपरिक सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इसे उन रोगियों के लिए कम इंवैसिव दृष्टिकोण माना जाता है, जिन्हेंं पेसमेकर तकनीक की आवश्यकता होती है।

पारंपरिक उपकरणों की तुलना में लीडलेस पेसमेकर के लाभ:

  • प्रत्यारोपण प्रक्रिया में कम समय लगने के कारण कम इंवैसिव
  • कम जटिलताओं के साथ तेजी से रिकवरी
  • सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर और कोई निशान नहीं दिखता
  • संक्रमण के साथ-साथ लीड और पाकेट संबंधी जटिलताओं से पूरी तरह से निजात
  • कंधे के मूवमेंट में कोई रुकावट नहीं

रोकथाम:

ब्रैडीकार्डिया हृदय रोग के कारण हो सकता है। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें स्वस्थ भोजन करना, धूमपान न करना, शरीर के वजन को कम करना (यदि अधिक वजन हो) और नियमित व्यायाम करना शामिल है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal