दिल्ली विरोध प्रदर्शनों में पुलिसकर्मियों पर हमला, 21 जवान घायल; महिला पुलिस से अभद्रता
दिल्ली में एसआइआर विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला और दुर्व्यवहार किया गया, जिसमें 15 महिला सहित 21 पुलिसकर्मी घायल हुए।
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विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी को लात मारते प्रदर्शनकारी। सौजन्य : इंटरनेट मीडिया
HighLights
एसआइआर विरोध प्रदर्शनों में 21 पुलिसकर्मी गंभीर घायल हुए।
महिला पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, वर्दी फाड़ी गई।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से आपसी सम्मान की अपील की।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एसआइआर के विरोध में पिछले दो अक्टूबर से नई दिल्ली जिले में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ न केवल मारपीट बल्कि जमकर खूब अभद्रता भी की।
पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की कर उनकी वर्दी फाड़ दी गई, गंदी-गंदी गालियां दी गई व महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की गई।
21 पुलिसकर्मियों को आई गंभीर चोट
सात दिनों तक चले प्रदर्शनों में 15 महिला समेत 21 पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में घायल पुलिसकर्मियों की एमएलसी बनी।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि प्रदर्शनकारी उन्हें बताते रहे कि विरोध प्रदर्शन करना उनका मौलिक अधिकार है, तो आखिर उनका मानवाधिकार क्या है?
महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई
पिछले दिनों चले प्रदर्शनों के दौरान सामने आई तस्वीरें जमीनी स्तर पर गंभीर टकराव को बयां करती हैं। तस्वीरों में पुलिसकर्मियों को भीड़ द्वारा धक्का देने और घेराव करते हुए देखा गया। महिला कर्मियों को खींचा गया, एक महिला की वर्दी पीटे जाने के कारण फट गई।
पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार
पुलिसकर्मियों का कहना है कि दुर्व्यवहार केवल बैरिकेड्स तक सीमित नहीं रहता है। वे पहले गालियां देना शुरू करते हैं, फिर पत्नी, बच्चों और माता-पिता को निशाना बनाते हैं। पुलिस अधिकारी का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी उकसाने और भीड़ जुटाने के लिए छोटे माइक्रोफोन का इस्तेमाल करते हैं, ताकि ऐसा लगे कि वे मीडिया से हैं।

पुलिस के साथ ड्यूटी के दौरान मारपीट
पुलिसकर्मियों का मानना है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार मौलिक है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने वालों के अधिकारों और सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती। ड्यूटी के दौरान उनके साथ गाली-गलौज, हाथापाई, भीड़ द्वारा घेरकर मारपीट और जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई की जाती है।
महिला पुलिसकर्मियों के साथ गलत व्यवहार
महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें अक्सर बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जब वे लोग किसी महिला प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने की कोशिश करती हैं, तो पुरुष प्रदर्शनकारी आकर उन्हें खींचने लगते हैं और अनुचित तरीके से छूते हैं।
महिला कर्मियों का आरोप है कि कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने उनपर थूका और कई बार काटा भी। उनके बैच और नेमप्लेट फाड़ दिए। प्रर्शनकारियों ने उनकी टोपी फेंक दी, उन्हें नीचे गिराया और उनके साथ मारपीट की। उनकी नेमप्लेट भी तोड़ दी गई।
दिल्ली पुलिस का नागरिकों के नाम खुला खत
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को नागरिकों के नाम एक खुला खत जारी कर आपसी सम्मान की अपील की और याद दिलाया कि पुलिसकर्मियों का भी परिवार होता है। एक्स पर 'हर नागरिक के नाम खुला खत'' शीर्षक से पोस्ट में पुलिस ने कहा कि वर्दी, राय और असहमति से परे, सबसे पहले सभी इंसान हैं। पोस्ट में एक पोस्टकार्ड था जिस पर हाथ से लिखा था, ''आपकी आवाज आपका हक है, और आपकी सुरक्षा हमारा फर्ज।'
