संजीव गुप्ता, नई दिल्ली

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की चली तो फरीदाबाद और गुरुग्राम में जल्द ही पार्किंग नीति बनाई जा सकती है। बोर्ड ने इस दिशा में पूरा मसौदा तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार को भेज दिया है। इसके अलावा हरियाणा राज्य में ईट भट्ठे भी बंद किए जा सकते हैं।

एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण थामने के लिए ईपीसीए (पर्यावरण संरक्षण एवं नियंत्रण प्राधिकरण) के निर्देश पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बाकायदा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट में अनेक कड़े कदम उठाने की सिफारिश की गई है। देखना यही है कि इस ड्राफ्ट में से कितनी सिफारिशें लागू हो पाती हैं। जागरण से बातचीत में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. एस नारायण ने बताया कि प्रदेश में अब तक कोई पार्किंग पॉलिसी नहीं है। कम से कम गुरुग्राम एवं फरीदाबाद के लिए तो यह बनानी ही पड़ेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ज्यादातर ईट भट्ठे नियम कायदों (जिग जैग तकनीक) पर नहीं चल रहे हैं। ऐसे में ईपीसीए के दिशा निर्देशों के हिसाब से इन्हें भी बंद करना ही श्रेयस्कर होगा।

एचपीसीसी के सदस्य सचिव की मानें तो ग्रेडिंग रिस्पांस सिस्टम लागू करने की दिशा में जिम्मेदारी भी हर विभाग को तय करनी होगी। इसके लिए हर विभाग से एक नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। इस नोडल अधिकारी का ही दायित्व होगा कि अपने विभाग की जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निवर्हन कराए। उन्होंने बताया कि धूल नहीं उड़े, एनसीआर में शामिल सभी जिलों में हरियाली बढ़ाने, डीजल चालित जनरेटर सैट का उपयोग सीमित करने एवं ऐसे कमर्शियल वाहनों का अलग रूट प्लान बनाने के लिए भी लिखा गया है जिनका गंतव्य कहीं और होता है और वे शहर में घुसकर वहां की आबोहवा को प्रदूषित करते हैं।

नारायण के मुताबिक इस मसौदे पर जल्द ही सरकार की मंजूरी मिलने की संभावना है। उधर ईपीसीए के अध्यक्ष डा. भूरेलाल ने बताया कि तीन फरवरी की बैठक में हरियाणा ही नहीं, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से भी पूरी रिपोर्ट ली जाएगी कि उन्होंने क्या प्लान तैयार किया है। ग्रेडिंग रिस्पांस सिस्टम को लागू तो हर हाल में किया जाना है।

ड्राफ्ट में अन्य प्रमुख कदम

- एनसीआर में शामिल जिलों की प्रमुख सड़कों की सफाई मशीनों से सुनिश्चित की जाए।

-परिवहन विभाग सुनिश्चित करे कि प्रदूषण जांच केंद्रों से प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए।

-यातायात पुलिस सुनिश्चित करे कि शहर के बीच से ऐसे कमर्शियल वाहन न गुजरने पाएं जिनकी मंजिल कहीं और हो। इनके लिए डायवर्टेड रूट प्लान तैयार किया जाए।

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