जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली: एक तरफ स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छ दिल्ली का नारा लगाते हुए जनप्रतिनिधि नहीं थकते, लेकिन हकीकत में यह सभी दिखावा साबित हो रहे हैं, क्योंकि अभियान के तहत सफाई कार्य को बेहतर बनाने के दावों का हकीकत से कोई लेना देना नहीं है। स्वच्छता के विकास के लिए हर नाली, गली और सार्वजनिक स्थान का स्वच्छ होना आवश्यक है, लेकिन रोहिणी के पॉश इलाके में इसकी कमी है। स्थानीय लोगों में भी इसको लेकर नाराजगी है। रोहिणी सेक्टर छह से सात की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर मौजूद सार्वजनिक शौचालय लोगों की असुविधा का कारण बन गया है। जिसकी गंदगी और दुर्गंध से लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। लोगों ने कुछ इस तरह अपनी परेशानी बयां की है।

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इस दूषित वातावरण में हमारा जीना मुश्किल हो गया है। सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं होता। मात्र शौचालय निर्माण से स्वच्छता का कार्य पूरा नहीं हो जाता, बल्कि इसकी स्वच्छता को बनाए रखने के लिए भी विभाग को गंभीरता से कार्य करना चाहिए।

अनिल कुमार, स्थानीय निवासी

स्वच्छता के विकास के लिए प्रत्येक सार्वजनिक जन सुविधाओं की देखभाल और सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। लेकिन इलाके में जनप्रतिनिधि स्वच्छता के विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति करते हैं। स्वच्छता अभियान के नाम पर फोटो खिंचवाते हैं।

राकेश गुप्ता, निवासी

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सफाई कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नियमित तौर पर सफाईकर्मियों को निर्देश दिए जाते हैं। सार्वजनिक जन सुविधाओं की सफाई को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। इलाके में कूड़ा उठाने के गाड़ियां नियमित रूप से लोगों के घर तक जाती हैं।

शशि ¨सह, स्थानीय निगम पार्षद