जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा विज्ञान भवन में अखिल भारतीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने किया। तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए 1300 से अधिक संस्कृत के विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्वानों ने दिल्ली के तमाम संस्कृत विद्यालयों व गुरुकुल को मान्यता या संबद्धता के लिए डॉ. गोस्वामी गिरधारी लाल प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान को अधिकृत किए जाने का प्रस्ताव भी पास किया।

उद्घाटन अवसर पर पर्यटन व भाषा संस्कृति विभाग के मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि संस्कृत भाषा का इतिहास काफी पुराना है। इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी भाषा का नहीं है। अति प्राचीन होने के कारण ही इस भाषा में शब्द निर्माण की क्षमता काफी प्रबल है। इसमें धार्मिक, साहित्य, अध्यात्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक विषयों का विस्तृत उल्लेख है। यही नहीं संस्कृत विश्व की अनेक प्राचीन एवं नवीन भाषाओं की जननी है। उन्होंने अपील की कि संस्कृत के विद्वान यह प्रयास करें कि संस्कृत भी अन्य भाषाओं की तरह दिल्ली की राजभाषा बने। जहां तक सरकार की बात है तो वे संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होने देंगे। अकादमी के सचिव डा. जीतराम भंट्ट ने बताया कि इस सम्मेलन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, गुजरात, हरियाणा व पंजाब सहित अन्य तमाम राज्यों से 1300 से अधिक संस्कृत जबकि 500 अन्य भाषा के विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर प्रो. रमेश कुमार पांडेय, प्रो. दीपक शर्मा, प्रो. उमा वैद्या, प्रो. रमेश चंद्र पण्डा व प्रो. पीयूष कांत दीक्षित इत्यादि मौजूद रहे।