यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 28, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एक ही विषय में बड़ी संख्या में फेल हुए छात्र
अभिनव उपाध्याय, नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में कई कॉलेजों में संपन्न हुई परीक्षा में

अभिनव उपाध्याय, नई दिल्ली
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में कई कॉलेजों में संपन्न हुई परीक्षा में अधिकतर छात्र एक ही विषय में फेल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, अनिवार्य प्रश्नपत्र सोशियोलॉजी में आश्चर्यजनक रूप से अधिकतर छात्र फेल हुए हैं। साउथ कैंपस के राजधानी कॉलेज में हिस्ट्री ऑनर्स अंतिम वर्ष के 42 छात्रों में से 32 छात्र इसमें फेल हो गए हैं। वहीं शिवाजी कॉलेज में अंग्रेजी ऑनर्स के60 छात्रों में से 57 छात्र इसमें फेल हुए हैं। लक्ष्मीबाई कॉलेज में तो राजनीति विज्ञान विभाग में 110 छात्रों में से 90 छात्र फेल हुए हैं। आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में भी छात्रों के फेल होने की सूचना है। फेल होने वाले कुछ छात्र जहां पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रहे हैं, वहीं कुछ छात्रों ने महज कॉलेज प्रिंसिपल या विषय के शिक्षक से ही शिकायत की है।
राजधानी कॉलेज में हिस्ट्री ऑनर्स अंतिम वर्ष की परीक्षा दे चुके छात्र जितेंद्र ने कहा, मैंने प्रथम, द्वितीय और अंतिम वर्ष में कुल मिलाकर प्रथम श्रेणी के अंक अर्जित किए हैं, लेकिन इतिहास में इतने कम अंक देखकर हैरान हूं। मैंने एमए में दाखिला के लिए आवेदन किया है, लेकिन चिंता इस बात की है कि क्या पुनर्मूल्यांकन का परिणाम दाखिला तक आ जाएगा। लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. वीना गौतम ने बताया कि हमारे यहां राजनीति विज्ञान के एक प्रश्नपत्र में काफी छात्र फेल हुए हैं। कितने छात्र फेल हुए हैं यह तो अभी नहीं बता सकती, लेकिन यह केवल हमारे कॉलेज का ही मामला नहीं है। अन्य कॉलेजों में भी इस विषय में अंक को लेकर छात्र-छात्राओं को शिकायत है। हमने अपने कॉलेज की शिकायतों को आगे बढ़ा दिया है।
उधर, परीक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि कापी की जांच करने वाले शिक्षक जो अंक देंगे परीक्षा विभाग उसे ही चढ़ा देगा। फिर भी यदि किसी छात्र को अंक को लेकर असंतोष है तो उसके लिए पुनर्मूल्यांकन का रास्ता खुला है। ज्ञात हो कि विगत वर्ष से डीयू में उत्तीर्ण फीसद में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हर साल ऐसा मामला भी आता है कि किसी एक विषय में बड़ी संख्या में छात्र फेल हो जाते हैं और बाद में उनको पुनर्मूल्यांकन का सहारा लेना पड़ता है।