यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 21, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सीबीसीएस के पाठ्यक्रम को आज दिया जाएगा अंतिम रूप
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के साउथ कैंपस में सोमवार को च्वाइस बेस्ड क

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के साउथ कैंपस में सोमवार को च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा बनाई गई कोर्स कमेटी के सदस्यों की बैठक होने जा रही है। इसमें कोर्स के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि कोर्स में जो भी कमियां हैं उसे दूर किया जाएगा, लेकिन इसके मूल स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। कमेटी में डीयू के अधिकांश ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों का प्रारूप तय किया है। दिलचस्प यह है कि इसमें अधिकांश वही शिक्षक हैं जिन्होंने विवादित चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की पाठ्य सामग्री तैयार की थी। कमेटी के चेयरमैन आरसी कोहाट हैं। डीयू के कार्यकारी समिति के सदस्य एके भागी का कहना है कि सीबीसीएस को बिना शिक्षकों की सहमति के लागू करना पूरी तरह गलत है। हम इसके खिलाफ हैं और हमने विभिन्न मंचों पर अपना विरोध भी जताया है। सवाल यह है कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों हो रही है, जबकि डीयू में चार हजार से अधिक शिक्षक तदर्थ हैं। यदि इसे लागू भी कर दिया जाता है तब भी इतना बड़ा बदलाव क्या स्थायी शिक्षकों के बिना पूरा हो पाएगा।
डीयू शिक्षक संघ (डूटा) की अध्यक्ष नंदिता नारायण का कहना है कि हम इस मामले को यूजीसी के सचिव के समक्ष उठा चुके हैं। कई अधिकारियों को तो इस बारे में पूरी तरह से पता भी नहीं है। जबकि इसका सीधा संबंध शिक्षक और छात्रों से है। इसमें 20 फीसद कोर्स बनाने की छूट विश्वविद्यालयों को दी गई है, लेकिन क्या इतना पर्याप्त है। यह पूरी तरह से कारपोरेट के दबाव में लिया जाने वाला निर्णय है। जिसके परिणाम घातक होंगे।
डीयू में एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलेपमेंट के अध्यक्ष डॉ. आदित्य नारायण मिश्र का कहना है कि हम शुरू से इसके खिलाफ हैं, क्योंकि यह सीधे-सीधे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला है। दो विश्वविद्यालय एक पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते हैं और यूजीसी पूरे देश में एक ही पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए बाध्य कर रहा है।