राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिला प्रक्रिया मई अंत या जून के पहले सप्ताह में शुरू होने वाली है। इसलिए ट्रांसजेंडर के दाखिला को लेकर डीयू ठोस नीति बना रहा है, जिसके कारण संभावना है कि इस वर्ष डीयू में इनके लिए दाखिला आसान हो जाएगा।

डीयू दाखिला फॉर्म के लिंग के खाने में ट्रांसजेंडर विकल्प की शुरुआत करने के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अब उनके लिए दाखिले के तौर-तरीकों पर काम कर रहा है हालांकि, एमए स्तर पर यह पहले से प्रक्रिया शुरू है।

विश्वविद्यालय के क्लस्टर इनोवेशन सेंटर (सीआइसी) ने परियोजना 'द थर्ड आई' (डिग्निटी ऑफ बीइंग) पर काम शुरू किया है, जो परिसर के शैक्षिक दायरे में ट्रासजेंडर समुदाय के सदस्यों को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में ट्रांसजेंडर को थर्ड जेंडर का दर्जा दिए जाने के बाद उनको ओबीसी श्रेणी में रखने की बात की गई है, लेकिन आवेदन फार्म पर थर्ड जेंडर अपने लिंग की पहचान लिख भी दे तब भी इसके लिए किए जाने वाले सत्यापन को लेकर कोई दिशा-निर्देश डीयू ने तय नहीं किए थे। ऐसे में स्नातक स्तर पर दाखिला में ट्रांसजेंडर के नाम पर फर्जी दाखिले की आशंका थी, लेकिन ऐसी संभावना है कि इसका समाधान डीयू बना लेगा क्योंकि सीआइसी द्वारा बनी टीम विश्वविद्यालय की दाखिला समिति के समक्ष एक मसौदा नीति पेश करेगी। समिति इसे अपनी अंतिम मंजूरी देगी। नीति आगामी शैक्षिक सत्र में लागू की जाएगी।

सीआइसी के निदेशक मदन मोहन चतुर्वेदी ने बताया कि उनके दाखिले के लिए दिशा-निर्देश तय करने से पहले उनके लिए आरक्षण का प्रतिशत कितना होगा, क्या उन्हें ओबीसी कोटा में जगह मिलेगी या उपश्रेणी होगी, वित्तीय मदद, उत्पीड़न निरोधी नियम, हॉस्टल सुविधा, शौचालय, अलग से ट्रासजेंडर सेल और स्वास्थ्य सुविधा जैसे विषयों पर विचार होना है।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए पिछले साल आए 90,000 आवेदनों में से 9 छात्रों ने खुद को ट्रासजेंडर बताया था। हालांकि, इसमें से कितनों ने दाखिला लिया था, इसके बारे में कोई जानकारी डीयू के पास नहीं है। ज्ञात हो कि डीयू का एडल्ट एजुकेशन विभाग ट्रांसजेंडर को मुख्य धारा में लाने के लिए और उनको अधिकारों को लेकर जागरूक करने के लिए काफी प्रयास कर रहा है।

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समाज में ट्रांसजेंडर को मुख्य धारा में लाने के लिए उनकी शिक्षा और अधिकारों पर ध्यान देना जरूरी है। विभाग उनके लिए वर्कशॉप आयोजित करता है। यह हमारे छात्रों के लिए भी अध्ययन का हिस्सा है।

- प्रो. राजेश, प्राध्यापक, एडल्ट एजुकेशन विभाग

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