जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :

देश में आज भी कई जगहों पर लड़कियों को पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है। लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता। यही नहीं कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है। महिलाएं हिंसा की शिकार हो रही हैं। गांवों में महिलाओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। हमें एकजुट होकर इसके लिए काम करना होगा। समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी। यह बातें शनिवार को सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी ने कहीं। मौका था यंग वूमेंस क्रिस्चियन एसोसिएशन ऑफ दिल्ली (वाइडब्ल्यूसीए) में 66 वें क्रिसेंदमम (गुलदाऊदी) शो का। कार्यक्रम में कनाडा उच्चायोग की मैरी जोस विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।

इस दौरान वाइडब्ल्यूसीए की महासचिव शशि ओबेद ने बताया कि वाइडब्ल्यूसीए हर साल दिसंबर के पहले शनिवार को इस शो का आयोजन करती है। कार्यक्रम का मकसद महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, असमानता आदि गंभीर विषयों को सामने लाना और उन पर काम करना है। इस बार शो का विषय 'अब मैं अकेली नहीं' है। शो में गुलदाऊदी की कई किस्मों के फूलों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। कपड़े, फूल, साज-सज्जा का सामान, खाद्य पदार्थ, चमड़े के पर्स आदि के स्टॉल भी लगाए गए थे। इस दौरान बच्चों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर वाइडब्ल्यूसीए की अध्यक्ष हेजेल सिरोमोनी, महासचिव सुचिश्री सेनगुप्ता, नीरा अरोड़ा समेत अन्य कई लोग मौजूद थे।