क्लाइमेट चेंज का कहर: देश के 11.7 करोड़ लोगों ने झेली भीषण गर्मी, दिल्ली में 18 दिन तक रहा जोखिम
देश में जून से अगस्त के दौरान 11.7 करोड़ लोगों ने जलवायु परिवर्तन से बढ़ी गर्मी झेली, जिसका असर दिल्ली-एनसीआर ...और पढ़ें

दिल्ली सहित देशभर में इस साल पड़ी भीषण गर्मी।
HighLights
11.7 करोड़ भारतीयों ने जलवायु परिवर्तन से बढ़ी भीषण गर्मी झेली।
दिल्ली में 20 दिन तापमान पर जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव दिखा।
भारत का औसत तापमान 1991-2020 से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। देश में इस साल जून से अगस्त के दौरान 11.7 करोड़ लोगों ने कम से कम 30 दिन ऐसी गर्मी का सामना किया, जिसकी संभावना जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ गई थी। इसका असर दिल्ली सहित एनसीआर में भी दिखाई दिया।
क्लाइमेट सेंट्रल के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस दौरान 20 दिन तापमान पर जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव रहा, जबकि 18 दिन स्थानीय औसत की तुलना में जोखिम भरी गर्मी वाले रहे। इनमें दो दिन ऐसे थे, जिन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी गर्मी से जोड़ा गया है।
दिल्ली के जून-अगस्त के औसत तापमान में 1991-2020 की तुलना में 0.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। एनसीआर में गाजियाबाद में 22 दिन जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव दिखा और 19 दिन जोखिम भरे गर्म रहे। मेरठ में क्रमश: 22 और 18 दिन रहे। फरीदाबाद और नई दिल्ली में 20-20 दिन तापमान पर जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव रहा, जबकि दोनों जगह 16-16 दिन जोखिम भरी गर्मी वाले रहे। फरीदाबाद और नई दिल्ली में ऐसे अतिरिक्त दिनों की संख्या शून्य रही।
नजफगढ़ में 17 दिन जोखिम भरी गर्मी
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी गर्मी का असर एक जैसा नहीं रहा। नजफगढ़ में 19 दिन तापमान पर जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव रहा और 17 दिन जोखिम भरी गर्मी वाले रहे। इनमें एक दिन ऐसा था, जिसकी संभावना जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी थी। इससे राजधानी के भीतर भी गर्मी के असर में क्षेत्रीय अंतर का संकेत मिलता है।
भारत में औसत तापमान 0.7 डिग्री अधिक
देश के स्तर पर जून से अगस्त के दौरान भारत का मौसमी औसत तापमान 1991-2020 के औसत से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इस दौरान देश में 39 दिन तापमान पर जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव दर्ज किया गया और 20 दिन जोखिम भरी गर्मी वाले रहे। इनमें नौ दिन ऐसे थे, जिनकी संभावना जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी थी।
ऐसे तय किए गए जोखिम भरे गर्म दिन
अध्ययन में किसी स्थान के 1991-2020 के स्थानीय तापमान के 90वें प्रतिशत से अधिक तापमान वाले दिन को ‘जोखिम भरा गर्म दिन’ माना गया है। इसके लिए एक जून से 31 अगस्त 2026 तक के दैनिक औसत तापमान का विश्लेषण किया गया। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स के जरिये मापा गया और दूसरे स्तर या उससे ऊपर के प्रभाव को मजबूत प्रभाव वाली गर्मी के रूप में लिया गया।
गर्मी के साथ बढ़े दूसरे खतरे
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक रही इस गर्मी का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहा। प्रभावित क्षेत्रों में रिकार्ड जंगल की आग, सूखे और आपातकालीन एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव जैसी स्थितियां भी सामने आईं।
दिल्ली एवं एनसीआर के प्रमुख आंकड़े
| क्षेत्र | जलवायु परिवर्तन का मजबूत प्रभाव | जोखिम भरे गर्म दिन | जलवायु परिवर्तन से बढ़े दिन |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 20 | 18 | 2 |
| नजफगढ़ | 19 | 17 | 1 |
| गाजियाबाद | 22 | 19 | 4 |
| मेरठ | 22 | 18 | 3 |
| फरीदाबाद | 20 | 16 | 0 |
| नई दिल्ली | 20 | 16 | 0 |
| भारत | 39 | 20 | 9 |
नोट: उपलब्ध आंकड़ों में एनसीआर के सभी शहर शामिल नहीं हैं; इसलिए जहां आंकड़े उपलब्ध हैं, वहीं तक क्षेत्रीय तुलना की गई है।
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