डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर 73 करोड़ की ठगी, दिल्ली पुलिस ने 11 साइबर ठगों को दबोचा
दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर ...और पढ़ें

HighLights
दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया
डिजिटल अरेस्ट और निवेश धोखाधड़ी में 11 आरोपित गिरफ्तार हुए
कंबोडिया से जुड़े तार, 73 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) टीम ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है।
दोनों मामलों में 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। जांच में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 78 शिकायतों से इनके तार जुड़े मिले हैं, जिनमें 73 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।
अधिकारी बनकर देते थे गिरफ्तारी की धमकी
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस अधिकारी या विभिन्न जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। पीड़ितों को उनके आधार कार्ड का मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होने की बात कहकर गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता था। इसके बाद फंड वेरिफिकेशन के नाम पर बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
जांच में आरोपी के तार कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में बैठे साइबर ठगों से जुड़े पाए गए। गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे ठगों को ठगी की रकम के लेनदेन के लिए बैंक खाते मुहैया कराते थे।
पूर्व निदेशक से 1.25 करोड़ रुपये ठगे
डीसीपी गौरव त्यागी के मुताबिक, जांच की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व निदेशक 69 वर्षीय प्रदीप कुमार दास की शिकायत से हुई।
14 अगस्त को आरोपी ने खुद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में होने की बात कहकर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
इसके बाद फंड वेरिफिकेशन के नाम पर तीन बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए 1.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। आरोपी वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहे और दो दिन तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखी।
द्वारका के फ्लैट में छापेमारी, पांच आरोपी गिरफ्तार
इंस्पेक्टर सतीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने द्वारका के रामफल चौक स्थित महामाया अपार्टमेंट के एक फ्लैट में छापेमारी की। यहां से अनिश खान, मोहम्मद महफूजार रहमान, इजहार आलम, अल्ताफ हुसैन और इंतखाब को गिरफ्तार किया गया। ये सभी बंगाल, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह से जुड़े छह आरोपी को स्पेशल सेल की टीम पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
बैंक खातों से विदेश भेजते थे एसएमएस और ओटीपी
जांच में सामने आया कि गिरोह एमआर ट्रेडर्स के नाम पर एचडीएफसी बैंक में खोले गए खाते के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन कर रहा था। आरोपी के मोबाइल फोन से टेलीग्राम चैट और एसएमएस टूल्स नाम का एप मिला। पुलिस के मुताबिक, इनके जरिए एसएमएस और ओटीपी विदेश में बैठे लोगों को भेजे जा रहे थे।
पुलिस ने छापेमारी में छह मोबाइल फोन और बैंक खाते की चेकबुक बरामद की।
मुख्य संचालक को मिलता था 5.5 प्रतिशत कमीशन
पुलिस के मुताबिक, अनिश खान गिरोह का मुख्य संचालक था और विदेश में बैठे हैंडलरों के संपर्क में रहता था। वह ठगी के लिए बैंक खातों का संचालन करता था और इसके बदले उसे 5.5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। यह रकम क्रिप्टोकरेंसी में दी जाती थी, जिसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय रुपये में बदला जाता था।
अल्ताफ हुसैन और इजहार आलम पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और संपर्क कराने की जिम्मेदारी थी। वहीं, इंतखाब अपने साथियों को दिल्ली लाने, उनके रहने-खाने की व्यवस्था करने और खाताधारकों पर नजर रखने का काम करता था।
10.25 करोड़ की ठगी में 7.25 करोड़ रुपये बचाए
जांच के दौरान विजयवाड़ा में 79 वर्षीय व्यक्ति से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 10.25 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया। संबंधित पुलिस के साथ समन्वय कर 7.25 करोड़ रुपये बचा लिए गए। इसके अलावा एचडीएफसी और एसबीआई के खातों में 1.96 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए।
जांच में ठगी के दो अन्य मामले भी सामने आए। बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर 21 लाख रुपये ठगे गए थे। वहीं, दिल्ली में सुरेंद्र प्रकाश से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 77 लाख रुपये ऐंठे गए थे।
