मुंबई। आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी प्रकरण से मुसीबतों में घिरी बीसीसीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उसे भ्रष्टाचार मामले की जांच के लिए प्रतिष्ठित लोगों की तीन सदस्यीय समिति का सुझाव दिया।

रविवार को बोर्ड की कार्य समिति ने आपात बैठक के दौरान जांच समिति के सदस्यों के रूप में पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रवि शास्त्री, कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएन पटेल और सीबीआइ के पूर्व निदेशक आरके राघवन के नामों का सुझाव देने का फैसला किया। बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर ने विदर्भ क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में हिस्सा लिया।

पता चला है कि लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के नाम पर भी बैठक में विचार किया गया, लेकिन बाद में कार्य समिति ने उपरोक्त तीन लोगों को चुना। सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को मामले की पिछली सुनवाई के दौरान आइपीएल-छह स्पॉट फिक्सिंग और सटटेबाजी प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए लोगों के नाम का सुझाव देने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट के 22 अप्रैल को अगली सुनवाई के दौरान बीसीसीआइ के सुझाव पर विचार करने और जांच के भविष्य के रुख पर आदेश देने की संभावना है। बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुछ इकाइयों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्य समिति की आपात बैठक बुलाने की मांग की थी जिसके बाद यह बैठक बुलाई गई।

शीर्ष न्यायालय ने 16 अप्रैल को कहा था कि बीसीसीआइ को अपनी संस्थानिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए एन श्रीनिवासन और 12 अन्य के खिलाफ सटटेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में जांच करनी चाहिए क्योंकि न्यायालय न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल समिति द्वारा लगाए गए आरोपों पर आंखें बंद नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति एके पटनायक और न्यायमूर्ति एफएम इब्राहिम खलीफुल्ला की खंडपीठ एसआइटी या सीबीआइ से जांच कराने के पक्ष में नहीं थी। खंडपीठ ने कहा था कि बीसीसीआइ की संस्थानिक स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है और इस मुद्दे पर गौर करने के लिए बीसीसीआइ द्वारा गठित समिति को प्राथमिकता दी जाएगी।

उधर, आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में बीसीसीआइ को सुप्रीम कोर्ट तक घसीटने वाले क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा ने रविवार को जांच के लिए बीसीसीआइ द्वारा सुझाए गए तीन सदस्यीय समिति का विरोध किया। वर्मा ने मांग की कि मामले की जांच का जिम्मा सीबीआइ या तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को दिया जाए। उन्होंने कहा, 'समिति में शामिल क्रिकेटर रवि शास्त्री लंबे समय से बीसीसीआइ के वेतनभोगी कर्मचारी हैं। पिछले दिनों उन्होंने 'श्रीनि चालीसा' खूब पढ़ी। ऐसे में उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल सीबीआइ या एनआइए से कराई गई जांच को ही मैं मानूंगा।'

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