सुनील गावस्कर का कॉलम:

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पहले नॉकआउट मुकाबले में कोलकाता नाइटराइडर्स को घरेलू प्रशंसकों के सामने खेलने का बड़ा लाभ मिलेगा। ईडन गार्डेंस के प्रशंसक हमेशा से नाइटराइडर्स के समर्थन में मजबूत स्तंभ के रूप में खड़े रहे हैं और वे राजस्थान के खिलाडिय़ों के लिए चीजें आसान नहीं होने देंगे। 

नाइटराइडर्स की कप्तानी में शुरुआत में थोड़े हिचकिचाते दिख रहे दिनेश कार्तिक ने बाकी खिलाडिय़ों को प्रेरित करते हुए आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपनी टीम को नॉकआउट दौर में में पहुंचाया। जिस ढंग से उन्होंने युवाओं का इस्तेमाल किया, वह लीडरशिप का बड़ा उदाहरण है। कार्तिक ने उन्हें मौके दिए और गलतियां करने और उनसे सीखने का मौका दिया। इसके बाद उन्हें टीम में रखना दिखाता है कि उन्हें उनकी प्रतिभा पर भरोसा है। शिवम मावी और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे खिलाड़ी उनके नेतृत्व में काफी आगे बढ़े। शुभमन गिल को भले ही बड़ा प्रभाव छोडऩे के लिए ज्यादा ओवर नहीं मिले हों, लेकिन उन्होंने अच्छा प्रभाव छोड़ा। जितनी देर भी उन्होंने बल्लेबाजी की, उसमें उन्होंने अपनी क्लास दिखा दी और सबसे अहम बात वह मैच की स्थिति को अच्छे से पढ़ते हैं। यही एक ऐसी बात है, जो उन्हें एक अच्छे खिलाड़ी के तौर पर विकसित होने में मदद करेगी। इसके अलावा विदेशी खिलाडय़िों जैसे सुनील नारायण, आंद्रे रसेल और क्रिस लिन ने भी अपना प्रभाव छोड़ा, लेकिन कोलकाता ने खासतौर पर भारतीय प्रतिभाओं को तराशने का काम किया।

राजस्थान के खिलाडिय़ों के साथ भी ऐसा ही है। अपने करो या मरो मुकाबले में बटलर और स्टोक्स को गंवाने के बाद भारतीय स्पिनरों ने आरसीबी के इर्द-गिर्द स्पिन का जाल बुना। हालांकि संजू सैमसन की फॉर्म में गिरावट आई है, लेकिन अभी भी वह ज्यादा से ज्यादा ओवर खेलने के हकदार हैं। आर्चर के ओपनर के तौर विफल होने का मतलब यह हुआ कि केरल के इस युवा को फिर से मौका मिल सकता है। श्रेयस गोपाल और राहुल त्रिपाठी पिछले मैच में शानदार रहे और वे इस बार भी रॉयल्स के लिए मैच का पासा पलट सकते हैं। परिणाम चाहे जो भी, ईडन के प्रशंसकों को कम करके आंकी गई दो अच्छी टीमों से खूब सारे मनोरंजन की उम्मीद होगी। 

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Posted By: Sanjay Savern

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