सुनील गावस्कर का कॉलम :

अंक तालिका में नंबर एक और दो पर रही टीमें ही आइपीएल के फाइनल में पहुंची हैं। जरूरत पडऩे पर वे दूसरी टीमों से थोड़ी बेहतर साबित हुईं और फाइनल में पहुंचने के लिए पूरी तरह से योग्य हैं।

इतिहास गवाह है कि दूसरे नंबर पर रहने वाली टीम खिताब जीतने में सफल रही है और इससे चेन्नई सुपर किंग्स के समर्थकों का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया होगा कि उनकी प्यारी टीम किसी परिकथा सरीखी वापसी करते हुए खिताब जीत सकती है। सनराइजर्स के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल कर सीधे फाइनल में पहुंचने से उन्हें यह विश्वास मिला होगा कि अगर विपक्षी टीम का पलड़ा भारी होता है, तो भी वे वापसी करते हुए जीत हासिल कर सकते हैं। फॉर्म में चल रहे अंबाती रायुडू की जगह फाफ डुप्लेसिस से ओपनिंग कराने को तब तक एक सही फैसला नहीं माना जा रहा था, तब तक प्लेसिस ने अपनी ताकत दिखाते हुए चौके-छक्के जड़कर टीम को जीत नहीं दिलाई। चेन्नई की बल्लेबाजी किसी भी विपक्षी टीम का सामना करने और किसी भी लक्ष्य को हासिल करने का दम रखती है, लेकिन उनका सामना ऐसी टीम से है, जिसे छोटे या बड़े अपने लक्ष्य को बचाने की आदत पड़ चुकी है।

सनराइजर्स की बल्लेबाजी में चेन्नई जैसी गहराई नहीं है और वह बहुत हद तक धवन और विलियमसन पर निर्भर है। अन्य खिलाड़ी अपने खेल के स्तर को ऊपर उठाने में विफल रहे हैं मगर एक खिलाड़ी हर मैच के साथ बेहतर होता जा रहा है और कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ उन्होंने दिखा दिया कि वह वन मैन आर्मी भी कहलाए  जा सकते हैं। राशिद खान की ताबड़तोड़ पारी ने हैदराबाद को जरूरी जोश दे दिया।

उन्होंने बहुत ही शानदार शॉट लगाए और एबी डिविलियर्स की तरह लगाया गया उनका फ्लिक इनमें सर्वश्रेष्ठ था। इसके बाद गेंदबाजी करते हुए उन्होंने एक बार फिर से अपना जादू बिखेरा और बल्लेबाजों को बांधकर रख दिया। अगर यह सब काफी नहीं था तो उन्होंने दो बेहतरीन कैच भी ली और गोली की रफ्तार से थ्रो फेंककर एक रनआउट भी किया। सनराइजर्स को राशिद खान ने ही फाइनल में पहुंचाया। उनकी ऊर्जा और युवा लड़कों जैसा जोश गजब है और अगर वह ऐसे ही फॉर्म में रहे, तो सनराइजर्स नया इतिहास रच सकता है।

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