IND vs WI: 'कभी मोटा कहकर चिढ़ाते थे लोग, हैवी गेंदबाजी से बल्लेबाजों को थर्राया'; जानें कौन हैं डेब्यूटेंट अंशुल कंबोज
भारतीय टीम ने शनिवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को डेब्यू का मौका दिया। ...और पढ़ें

अंशुल कंबोज
HighLights
अंशुल कंबोज को मिला वनडे डेब्यू का मौका
विराट कोहली ने अंशुल कंबोज को वनडे डेब्यू कैप सौंपी
अंशुल कंबोज को प्रसिद्ध कृष्णा की जगह किया गया था शामिल
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय टीम ने शनिवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ न्यू चंडीगढ़ में जारी तीसरे वनडे में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को डेब्यू का मौका दिया। विराट कोहली ने कंबोज को वनडे डेब्यू कैप सौंपी। याद हो कि कंबोज को तीसरे वनडे के लिए चोटिल प्रसिद्ध कृष्णा के रिप्लेसमेंट के रूप में शामिल किया गया था।
25 साल के कंबोज ने भारत के लिए दूसरे प्रारूप में डेब्यू किया। इससे पहले वो इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं। बता दें कि भारतीय टीम पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी है और उसकी कोशिश वेस्टइंडीज का 3-0 से क्लीन स्वीप करने की है।
कौन हैं अंशुल कंबोज
अंशुल कंबोज का जन्म 6 दिसंबर 2000 को हरियाणा के करनाल में हुआ। उनके पिता फाजिलपुर में किसानी करते हैं। कंबोज ने 11 साल की उम्र से पेशेवर क्रिकेट की ट्रेनिंग शुरू की। उन्होंने सबसे पहले करनाल में राणा भाई की एकेडमी में एडमिशन लिया।
अंशुल के पिता सुबह 4 बजे उठकर अपने बेटे को बाइक पर पीछे बैठाकर एकेडमी लेकर जाते थे। अंशुल के बचपन के कोच सतीश राणा ने बताया कि कैसा भी मौसम हो। अंशुल और उनके पिता समय पर ट्रेनिंग पर पहुंच जाते थे।
ग्लेन मैक्ग्रा को मानते हैं अपना आदर्श
अंशुल कंबोज 140-145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं। वो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा को अपना आदर्श मानते हैं। कंबोज अपने आदर्श की तरह गेंदबाजी के लिए समर्पित हैं। वो एक ही टिप्पे पर लगातार लंबे समय तक गेंदबाजी कर सकते हैं। अंशुल की खूबी मानी जाती है कि वो बिना थके एक दिन में 25 से ज्यादा ओवर गेंदबाजी कर सकते हैं।
बचपन में खूब उड़ा मजाक
अंशुल कंबोज बचपन में काफी मोटे थे। यही वजह थी कि उनका लोग खूब मजाक बनाते थे। लोग उन्हें मोटा कहकर चिढ़ाते थे। हालांकि, अंशुल अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहे। उन्होंने एकेडमी में जमकर अभ्यास किया और अपना वजन भी घटाया। अंशुल ने अपनी आदत बना ली कि जिस तरह सुबह 9 बजे गेंदबाजी करते हैं, ठीक उसी अंदाज और गति के साथ शाम 5 बजे भी गेंदबाजी करें।
अंडर-19 के दिनों से ही अंशुल अपनी लाइन लेंथ पर काफी ध्यान देते थे। उन्होंने कभी कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम मिस नहीं किया। वो बहुत अनुशासित थे तो चोटों से बचकर रहे। जिस समय जो करना होता है, वह उसे उसी समय करते हैं।
हैवीबॉल से बनाई पहचान
अंशुल कंबोज ने घरेलू क्रिकेट में काफी मेहनत की और हैबी बॉल के रूप में अपनी पहचान बनाई। क्रिकेट में 140-150 प्रति किलोमीटर घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले बहुत गेंदबाज मिलेंगे, लेकिन ये ऐसा गेंदबाज है जो क्रिकेट की भाषा में बहुत हैवी गेंद फेंकता है।
हैवी गेंद का मतलब जब बल्लेबाज खेल रहा होता है तो उसके हाथों को महसूस होता है कि गेंद बहुत जोर से बल्ले पर लगी है। ये क्वालिटी बेहद ही कम गेंदबाजों में होती है।
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