जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एन. श्रीनिवासन अगर दोबारा बीसीसीआइ के अध्यक्ष चुन भी लिए जाते हैं तो भी उनके पदभार ग्रहण करने पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीसीसीआइ को वार्षिक जनरल मीटिंग (एजीएम) करने और चुनाव कराने की अनुमति दी, लेकिन अध्यक्ष चुने जाने की स्थिति में श्रीनिवासन पदभार ग्रहण नहीं कर पाएंगे।

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रविवार को चेन्नई में बीसीसीआइ की एजीएम की बैठक और चुनाव होने हैं। श्रीनिवासन अध्यक्ष पद के लिए खड़े हो रहे हैं। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एजीएम और बीसीसीआइ चुनाव पर रोक लगाने की मांग की है। न्यायमूर्ति एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ सोमवार को इस मामले की फिर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यदि दामाद पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है तो फिर आप प्रभारी (बीसीसीआइ के अध्यक्ष) क्यों बने हुए हैं। आप (श्रीनिवासन) निर्वाचित होने के लिए इतने उत्सुक क्यों हैं।

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सीएबी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि बीसीसीआइ प्राइवेट सोसाइटी होने की दलील देकर नहीं बच सकती। ये सरकारी स्टेडियम का प्रयोग करती है सरकारी सुविधाएं लेती है। ये मामला संस्था की साख से जुड़ा है। याचिका पर सुनवाई होने तक चुनाव की तिथि बढ़ाई जाए। दूसरी ओर बीसीसीआइ ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि एजीएम की बैठक पहले से तय है और 37 सदस्य इसमें भाग लेने आ रहे हैं। इस पर पीठ की टिप्पणीं थी कि बैठक उस दिन क्यों रखी गयी जिस दिन कोर्ट सुनवाई नहीं करता।

इन सबसे इतर निर्वासित बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन ने कहा कि अदालत ने एक भी ऐसा आदेश नहीं दिया जो उन्हें बोर्ड अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल एक साल बढ़ाने से रोकता हो। श्रीनिवासन का इस पद पर दो साल का नियमित कार्यकाल समाप्त होने वाला है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी मुझे दोबारा चुनाव लड़ने और एजीएम में भाग लेने से नहीं रोका है। मैं चुनाव लड़ने जा रहा हूं। मैं आखिर चुनाव क्यों नहीं लड़ूं। वहीं कार्यभार नहीं संभाल सकने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्होंने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।

'मेरे दामाद को मेरी बेटी ने चुना है। इसमें मेरा कोई भी भूमिका नहीं है।'

-एन. श्रीनिवासन

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