उमेश राजपूत, नई दिल्ली। बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए मुंबई के 26 साल के ऑलराउंडर शिवम दुबे का चयन होने के बाद उनके पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। शिवम के एक दोस्त के जरिये उन्हें बेटे के भारतीय टीम में चुने जाने की बात पता चली। अब उन्हें उस दिन का इंतजार है जब शिवम जल्द ही टीम इंडिया की जर्सी पहने हुए खेलते नजर आएंगे। हालांकि, वह चाहते हैं कि उनका बेटा एक दिन टेस्ट क्रिकेट भी खेले।

अभी कसक बाकी : शिवम के पिता राजेश दुबे कहते हैं कि इस खुशी को वह शब्दों में बयां नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, 'शिवम जब चार साल का था तो मैंने उसे क्रिकेट खिलाना शुरू किया था। उस दिन जब मैंने उसे पहली गेंद खिलाई थी तभी तय कर लिया था कि एक दिन उसे भारत के लिए जरूर खिलाऊंगा। हालांकि, अभी एक कसक बाकी है, वह यह कि मैं उसे सफेद कपड़ों में टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए देखना चाहता हूं, क्योंकि असल क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट ही है।'

चयन की थी उम्मीद : राजेश ने कहा, 'शिवम ने भारत-ए के लिए और विजय हजारे ट्रॉफी में बतौर ऑलराउंडर बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। उस प्रदर्शन के आधार पर हमें उम्मीद थी कि उसे बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुना जाना चाहिए। साथ ही उसके चुने जाने का एक कारण हार्दिक पांड्या का चोटिल होना भी था।'

असल परीक्षा अब : टीम में चुने जाने के बाद राजेश ने शिवम को कहा कि तुम्हारी असल परीक्षा अब शुरू होगी, क्योंकि टी-20 में जिस जगह पर पांड्या खेलता है वहां खेलने पर तुम्हारे कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस पर शिवम ने कहा कि मैंने मेहनत की है तो ऊपर वाला भी मेरा साथ देगा।

बेटे के लिए पिता ने सब कुछ छोड़ा : मैंने अपने घर में शिवम के लिए विकेट तैयार किया। वहीं सुबह नौ से 12 बजे तक और फिर दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक मैं शिवम को अभ्यास करता था। शिवम को क्रिकेटर बनाने के लिए मैंने सब कुछ छोड़ दिया था, यहां तक कि सामाजिक कार्यक्रमों में भी आना-जाना बंद कर दिया था। शिवम ने करीब पांच साल तक पूर्व भारतीय क्रिकेटर चंद्रकांत पंडित से कोचिंग भी ली।

फिर छूट गया क्रिकेट : शिवम के परिवार में माता-पिता के अलावा तीन बड़ी बहनें हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। शिवम का जन्म मुंबई का है। शिवम के दादा करीब 40 साल पहले भदोही से मुंबई आए थे और अंधेरी स्थित नागर दास रोड पर उन्होंने मकान बनाया। उन्होंने मुंबई में तबेला शुरू किया, जिसमें करीब 500 भैंस थीं। बाद में शिवम के पिता ने जींस फैक्टरी शुरू की थी। वह कहते हैं, 'बीच में मेरी फैक्टरी की कुछ ऐसी हालात हो गई कि मुझे शिवम का क्रिकेट बंद करना पड़ा। 2011 से लेकर 2016 तक शिवम का क्रिकेट खेलना पूरी तरह से बंद हो गया। इसके बाद हालात सुधरे तो शिवम ने फिर से खेलना शुरू किया।'

विश्वास था आगे जाएगा : राजेश बताते हैं कि शिवम का क्रिकेट में कोई आदर्श तो नहीं है, लेकिन वह वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा के बारे में काफी बातें करता है। शिवम ने सिर्फ 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। शिवम के ज्यादा नहीं पढ़ने के बारे में राजेश बताते हैं, मैं खुद शिवम को बोलता था कि या तो पढ़ाई करो या फिर क्रिकेट खेलो। मुझे विश्वास था कि शिवम क्रिकेट में बहुत आगे जाएगा।

Posted By: Sanjay Savern

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